पंजाब में बिजली संकट गहराया,दो दिन बाद लगेंगे कट: सरकार का दावा-प्राइवेट प्लांटों के पास कोयले का स्टॉक नहीं, उत्पादन प्रभावित; इंडस्ट्री ने दी पलायन की धमकी - Ludhiana News

Published on 8 सित॰ 2026

पंजाब में बिजली संकट दिन प्रतिदिन गहराता जा रहा है। पंजाब के प्राइवेट थर्मल प्लांटों के पास दो दिन का कोयला बचा है यानि दो दिन बाद प्राइवेट थर्मल प्लांटों में बिजली का उत्पादन बंद हो जाएगा। अगर ऐसा हुआ तो सूबे के आम लोगों से लेकर इंडस्ट्री को लंबे बि

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राज्य सरकार ने इस बिजली संकट से उभरने के लिए क्या प्रयास किए इस पर न तो बिजली मंत्री कुछ बता रहे हैं और न ही पावरकॉम के शीर्ष अधिकारी कुछ बता रहे हैं। जिससे उपभोक्ताओं में बिजली संकट का भय बना हुआ है।

वहीं दूसरी तरफ, पावर कट से परेशान लुधियाना के उद्यमियों ने चीफ इंजीनियर सेंट्रल जोन जगदेव सिंह हांस के जरिए सरकार को चेतावनी दी है कि अगर उन्हें निरंतर बिजली नहीं मिलती है तो वो दूसरे राज्यों में अपने कारोबार ट्रांसफर करने के लिए मजबूर हो जाएंगे।

बिजली संकट से जूझ रहे उद्यमी पावरकॉम के अफसरों से बैठक करते हुए।

बिजली संकट से जूझ रहे उद्यमी पावरकॉम के अफसरों से बैठक करते हुए।

इंजीनियर्स एसोसिएशन ने पावर संकट पर सीएम को लिखी ये अहम बातें...

  • वित्तीय बदहाली और भारी घाटा: पीएसईबी इंजीनियर्स एसोसिएशन के जनरल सेक्रेटरी अजयपाल सिंह अटवाल का कहना है कि PSPCL की वित्तीय स्थिति बेहद चिंताजनक स्तर पर पहुंच चुकी है। केवल चालू वित्तीय वर्ष में ही पीएसपीसीएल को अपनी वास्तविक खर्च की जरूरतों के मुकाबले लगभग ₹7,800 करोड़ के भारी-भरकम राजस्व घाटे का सामना करने का अनुमान जताया गया है।
  • बकाया सब्सिडी और सरकारी विभागों का डिफॉल्ट: इंजीनियर अजयपाल सिंह अटवाल का कहना है कि संकट की मुख्य वजह पंजाब सरकार द्वारा बकाया सब्सिडी राशि का समय पर भुगतान न करना है। इसके साथ ही विभिन्न सरकारी विभागों द्वारा करोड़ों रुपये के बिजली बिलों का बकाया रखना (डिफ़ॉल्ट) निगम को कंगाली की कगार पर धकेल रहा है।
  • कमजोर ARR और अनुचित टैरिफ निर्धारण: हालिया ARR में व्यय के अनुमानों को जानबूझकर वास्तविक जरूरत से कम आंका गया। इससे टैरिफ दरों में अनुचित कटौती हुई और निगम पर अत्यधिक वित्तीय दबाव बन गया, जिसकी भरपाई करना अब मुश्किल हो रहा है।
  • महंगी बिजली खरीद और बैंकिंग की असफलता: पीक समर के दौरान राज्य का अपना उत्पादन मांग के मुकाबले काफी घट जाता है, जिससे एनर्जी एक्सचेंज से अत्यधिक महंगी दरों पर बिजली खरीदनी पड़ती है। हिमाचल प्रदेश जैसे जल-विद्युत समृद्ध राज्य भी अब पंजाब के साथ बिजली बैंकिंग करने के बजाय खुले बाजार में ऊंचे दामों पर बिजली बेचने को प्राथमिकता दे रहे हैं।
  • निजी IPPs पर निर्भरता और कोयला संकट: पंजाब के निजी थर्मल प्लांटों (IPPs) में कोयले की भारी कमी बनी हुई है। निजी प्लांटों पर अत्यधिक निर्भरता के कारण पंजाब का अरबों रुपये का पूंजीगत निवेश राज्य से बाहर निजी कंपनियों की जेब में जा रहा है।
  • भावी मांग और ब्लैकआउट का खतरा: आगामी वर्षों में औद्योगिक विस्तार, कृषि मांग, डेटा सेंटर और घरेलू खपत बढ़ने से बिजली की मांग में भारी उछाल आएगा। यदि समय रहते राज्य के भीतर उत्पादन क्षमता नहीं बढ़ाई गई, तो राज्य के पास अवांछित और लंबे पावर कट लगाने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचेगा।

इंजीनियर्स एसोसिएशन ने दिए मैनेजमेंट को पावर संकट से निपटने के लिए ये सुझाव ....

  • रोपड़ में 3×800 MW थर्मल यूनिट्स की तत्काल शुरुआत: रोपड़ थर्मल पावर प्लांट के तहत राज्य क्षेत्र में 3×800 MW की नई उत्पादन इकाइयों को शीर्ष प्राथमिकता पर सभी आवश्यक मंजूरियों और विकास कार्यों के साथ तुरंत शुरू किया जाए। यह प्रोजेक्ट पहले ही PSPCL के निदेशक मंडल द्वारा मंजूर किया जा चुका है।
  • GNDTP स्थल पर 250 MW सोलर प्रोजेक्ट का निर्माण: गुरु नानक देव थर्मल प्लांट (GNDTP) की खाली जमीन और मौजूदा बुनियादी ढांचे का अधिकतम उपयोग करते हुए राज्य क्षेत्र के तहत 250 MW क्षमता का सौर ऊर्जा प्रोजेक्ट तुरंत विकसित किया जाए।
  • नियम तोड़ने वाले निजी IPPs पर सख्त पेनल्टी: CEA नियमों के अनुसार गैर-पिटहेड प्लांटों के लिए 26 दिनों का अनिवार्य कोयला स्टॉक न रखने वाले निजी IPPs पर सख्त कार्रवाई की जाए। PPA शर्तों के तहत उनके फिक्स्ड चार्जेज में कटौती की जाए और वित्तीय जुर्माना लगाकर नुकसान की भरपाई की जाए।
  • दीर्घकालिक उत्पादन क्षमता वृद्धि योजना: पंजाब की भविष्य की अनुमानित मांग वृद्धि के अनुरूप एक ठोस और दीर्घकालिक उत्पादन क्षमता वृद्धि योजना तैयार की जाए। इससे राज्य की भावी बिजली जरूरतों को बाहरी व निजी खरीद के बजाय अपनी विश्वसनीय आंतरिक क्षमता से पूरा किया जा सकेगा।
  • स्थानीय रोजगार का सृजन और आर्थिक सुरक्षा: राज्य-क्षेत्र की बिजली परियोजनाओं में निवेश बढ़ाने से निर्माण और परिचालन के दौरान पंजाब के युवाओं के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के हजारों नए अवसर बनेंगे। इससे बिजली क्षेत्र से उत्पन्न होने वाला आर्थिक मूल्य राज्य के भीतर ही सुरक्षित रहेगा।

कोयले को लेकर पंजाब में राजनीति

पंजाब के बिजली मंत्री ने दो दिन पहले सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट की जिसमें उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार से निजी थर्मल प्लांटों को कोयल नहीं मिल रहा है जिसकी वजह से प्लांट आधी से कम क्षमता पर काम कर रहे हैं। बिजली उत्पादन कम होने से पावरकट लगाने पड़ रहे हैं। बिजली मंत्री तरूणप्रीत सोंद ने यहां तक कह दिया कि अगर कोयले की सप्लाई नहीं मिली तो पब्लिक लंबे पावरकट के लिए तैयार रहे। वहीं केंद्र सरकार के कोयला मंत्रालय ने स्पष्ट कर दिया कि कोयले की कोई कमी नहीं है और पर्याप्त मात्रा में कोयले का आबंटन किया गया है। पंजाब में अब कोयले को लेकर राजनीति शुरू हो गई। आप बिजली संकट के लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहरा रही है वहीं भाजपा इसके लिए आप सरकार को जिम्मेदार बता रही है। भाजपा का तर्क है कि आप सरकार के पुअर मैनेजमेंट की वजह से बिजली कट लग रहे हैं।