बार-बार खाते हैं दर्द की गोली? किडनी हो सकती है फेल; नेफ्रोलॉजिस्ट ने दी चेतावनी, जानिए कैसे पेनकिलर बन जाती है 'साइलेंट किलर'

Published on 10 सित॰ 2026

बार-बार खाते हैं दर्द की गोली? किडनी हो सकती है फेल; नेफ्रोलॉजिस्ट ने दी चेतावनी, जानिए कैसे पेनकिलर बन जाती है 'साइलेंट किलर'

बार-बार खाते हैं दर्द की गोली? किडनी हो सकती है फेल; नेफ्रोलॉजिस्ट ने दी चेतावनी, जानिए कैसे पेनकिलर बन जाती है 'साइलेंट किलर'

सिरदर्द, दांत दर्द, बदन दर्द या जोड़ों में हल्की सी टीस उठते ही मेडिकल स्टोर से पेनकिलर (दर्दनिवारक दवा) खरीदकर खा लेना आज अधिकांश लोगों की आम आदत बन चुका है। लेकिन बिना डॉक्टर के पर्चे (OTC) के बार-बार ली जाने वाली ये गोलियां आपके शरीर के सबसे संवेदनशील अंग—किडनी (गुर्दे) को चुपचाप तबाह कर सकती हैं।

वरिष्ठ नेफ्रोलॉजिस्ट्स (गुर्दा रोग विशेषज्ञों) का कहना है कि डायलिसिस यूनिट्स और ओपीडी में आने वाले कई युवा और बुजुर्ग मरीजों में किडनी फेलियर का सीधा संबंध बिना डॉक्टरी सलाह के लंबे समय तक पेनकिलर्स के अत्यधिक इस्तेमाल से पाया जा रहा है। मेडिकल साइंस में इस स्थिति को 'एनाल्जेसिक नेफ्रोपैथी' (Analgesic Nephropathy) कहा जाता है, जहां दर्द की दवाएं सीधे गुर्दे की कार्यप्रणाली को ठप कर देती हैं।

कैसे किडनी को बर्बाद करती हैं दर्द की दवाएं? समझिए मेडिकल साइंस

दुकानों पर सामान्य रूप से मिलने वाली अधिकांश दर्दनिवारक दवाएं NSAIDs (Non-Steroidal Anti-inflammatory Drugs) वर्ग की होती हैं—जैसे कि डाइक्लोफेनाक (Diclofenac), आइबुप्रोफेन (Ibuprofen), एसीक्लोफेनाक (Aceclofenac), नेप्रोक्सन और मेफेनेमिक एसिड।

  • ब्लड फ्लो में अचानक रुकावट: जब आप NSAIDs दवा लेते हैं, तो यह शरीर में दर्द और सूजन पैदा करने वाले एंजाइम्स (COX-1 और COX-2) को ब्लॉक करती है। लेकिन इसके साथ ही यह 'प्रोस्टाग्लैंडिंस' (Prostaglandins) नामक रसायन के निर्माण को भी रोक देती है।

  • प्रोस्टाग्लैंडिंस का मुख्य काम किडनी की ओर जाने वाली रक्त धमनियों को फैलाकर रखना होता है ताकि गुर्दों को पर्याप्त खून और ऑक्सीजन मिलती रहे।

  • जैसे ही यह केमिकल ब्लॉक होता है, किडनी में रक्त का प्रवाह (Renal Blood Flow) अचानक काफी गिर जाता है।

  • फिल्टरिंग नेफ्रॉन्स का सूखना: खून की लगातार कमी से किडनी की सूक्ष्म फिल्टरिंग इकाइयां (Glomeruli और Tubules) क्षतिग्रस्त होने लगती हैं, जिससे खून से विषाक्त पदार्थ (Toxins) छनने बंद हो जाते हैं और सीरम क्रिएटिनिन व यूरिया का स्तर तेजी से बढ़ने लगता है।

कौन से मरीज हैं सबसे ज्यादा जोखिम में?

वैसे तो पेनकिलर का अनियंत्रित उपयोग किसी भी स्वस्थ व्यक्ति की किडनी को नुकसान पहुंचा सकता है, लेकिन कुछ वर्गों के लिए यह जहर के समान खतरनाक होता है:

  • डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर के मरीज: इन मरीजों की किडनी की रक्त नलिकाएं पहले से ही दबाव में होती हैं, ऐसे में पेनकिलर का एक डोज भी 'एक्यूट किडनी इंजरी' (AKI) ट्रिगर कर सकता है।

  • 60 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्ग: उम्र बढ़ने के साथ किडनी का जीएफआर (GFR - फिल्टरिंग क्षमता) प्राकृतिक रूप से घटता है।

  • डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) की स्थिति: जब शरीर में पानी की कमी हो या धूप/उल्टी-दस्त के बाद पेनकिलर ली जाए, तो गुर्दे पर इसका दुष्प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है।

  • हार्ट फेलियर या लिवर सिरोसिस के मरीज: ऐसे लोगों में ब्लड सर्कुलेशन पहले से कमजोर होता है, जिससे किडनी तुरंत टॉक्सिसिटी की चपेट में आ जाती है।

इन शुरुआती लक्षणों को बिल्कुल न करें नजरअंदाज

एनाल्जेसिक नेफ्रोपैथी की सबसे डरावनी बात यह है कि शुरुआती दौर में इसके कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते। जब तक लक्षण सामने आते हैं, तब तक किडनी का 60 से 70 फीसदी हिस्सा निष्क्रिय हो चुका होता है। फिर भी इन संकेतों पर नजर रखें:

  • पैरों, टखनों और आंखों के नीचे सुबह के समय सूजन (Edema) दिखाई देना।

  • पेशाब की मात्रा में कमी आना या झागदार (Foamy) पेशाब होना।

  • बिना मेहनत किए अत्यधिक थकान, कमजोरी और भूख न लगना।

  • त्वचा पर लगातार खुजली और मुंह का स्वाद कड़वा या धातु जैसा महसूस होना।

  • ब्लड प्रेशर का अचानक अनियंत्रित रूप से बढ़ जाना।

सुरक्षित विकल्प क्या हैं और कैसे करें बचाव?

नेफ्रोलॉजिस्ट्स का स्पष्ट सुझाव है कि दर्द को दबाने के बजाय उसके मूल कारण का इलाज करना चाहिए:

  • पैरासिटामोल (Paracetamol) अधिक सुरक्षित: हल्के से मध्यम सिरदर्द या बदन दर्द के लिए पैरासिटामोल को तय मात्रा (दिन में अधिकतम 2-3 ग्राम) में NSAIDs की तुलना में किडनी के लिए काफी सुरक्षित माना जाता है (बशर्ते लिवर की बीमारी न हो)।

  • लोकल ऑइंटमेंट और सिकाई: जोड़ों या कमर के दर्द में गोली गटकने के बजाय गर्म/ठंडी सिकाई (Hot/Cold Compress), फिजियोथेरेपी और दर्दनिवारक जेल या स्प्रे का इस्तेमाल करें, क्योंकि ये सीधे खून में घुलकर किडनी तक नहीं पहुंचते।

  • बिना डॉक्टर के 3 दिन से ज्यादा न लें दवा: यदि किसी कारणवश पेनकिलर लेनी ही पड़े, तो इसे कम से कम खुराक (Lowest effective dose) में और लगातार 2-3 दिनों से अधिक कभी न लें।

  • दवा खाते समय भरपूर पानी पिएं: पेनकिलर कभी भी खाली पेट या डिहाइड्रेशन की स्थिति में न लें; पर्याप्त पानी पीने से टॉक्सिसिटी का असर कम होता है।