प्रेगनेंसी का पहला अल्ट्रासाउंड: कब, क्यों और कैसे होता है? जानिए डॉक्टर रिपोर्ट में क्या देखते हैं और क्यों जरूरी है ये टेस्ट

Published on 10 सित॰ 2026

प्रेगनेंसी का पहला अल्ट्रासाउंड: कब, क्यों और कैसे होता है? जानिए डॉक्टर रिपोर्ट में क्या देखते हैं और क्यों जरूरी है ये टेस्ट

प्रेगनेंसी का पहला अल्ट्रासाउंड: कब, क्यों और कैसे होता है? जानिए डॉक्टर रिपोर्ट में क्या देखते हैं और क्यों जरूरी है ये टेस्ट

गर्भावस्था परीक्षण (UPT) पॉजिटिव आते ही होने वाले माता-पिता के मन में सबसे पहला सवाल यही उठता है कि बच्चे की स्थिति देखने के लिए डॉक्टर के पास कब जाना चाहिए और पहला अल्ट्रासाउंड कब होगा।

चिकित्सा विज्ञान में पहले अल्ट्रासाउंड को आमतौर पर 'डेटिंग और वायबिलिटी स्कैन' (Dating and Viability Scan) या 'अर्ली प्रेगनेंसी स्कैन' कहा जाता है।

  • सही समय: यह टेस्ट सामान्यतः गर्भधारण के छठे से आठवें सप्ताह (6 से 8 Weeks) के बीच कराने की सलाह दी जाती है (अंतिम माहवारी यानी LMP के पहले दिन से गिनने पर)।

  • यदि किसी महिला को पहले मिसकैरेज का इतिहास रहा हो, पेट के निचले हिस्से में तेज दर्द हो या हल्की ब्लीडिंग/स्पॉटिंग दिख रही हो, तो डॉक्टर इसे 5वें सप्ताह में भी कराने की सलाह दे सकते हैं।

पहले अल्ट्रासाउंड में डॉक्टर क्या-क्या जांचते हैं?

यह स्कैन केवल एक औपचारिकता नहीं है, बल्कि मां और बच्चे दोनों की प्राथमिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण मेडिकल स्टेप है। इस दौरान डॉक्टर निम्नलिखित प्रमुख बिंदुओं की जांच करते हैं:

  • 1. गर्भ की सही स्थिति (इम्प्लांटेशन): सबसे पहले यह देखा जाता है कि भ्रूण (Embryo) गर्भाशय (Uterus) के अंदर सही जगह पर स्थापित हुआ है या नहीं। यह टेस्ट एक्टोपिक प्रेगनेंसी (Ectopic Pregnancy) के जानलेवा जोखिम को खारिज करता है, जिसमें भ्रूण गर्भाशय के बाहर (जैसे फैलोपियन ट्यूब में) विकसित होने लगता है।

  • 2. शिशु के दिल की धड़कन (Fetal Heartbeat): 6 से 7 सप्ताह के आसपास भ्रूण का दिल धड़कना शुरू हो जाता है। अल्ट्रासाउंड में फीटल पोल और दिल की धड़कन (Fetal Heart Rate - FHR) की जांच की जाती है, जो आमतौर पर 110 से 160 बीट्स प्रति मिनट (bpm) के बीच सामान्य मानी जाती है।

  • 3. गेस्टेशनल सैक और योक सैक: डॉक्टर देखते हैं कि गर्भाशय में गेस्टेशनल सैक (पानी की थैली) और योक सैक (जो शुरुआती हफ्तों में भ्रूण को पोषण देता है) ठीक से बने हैं या नहीं।

  • 4. सटीक डिलीवरी डेट (EDD) का निर्धारण: कई महिलाओं के पीरियड्स अनियमित होते हैं। इस स्कैन में भ्रूण के सिर से नितंब तक की लंबाई यानी क्राउन-रम्प लेंथ (CRL) मापी जाती है, जिससे बच्चे की सटीक उम्र (Gestational Age) और संभावित डिलीवरी की तारीख (Due Date) तय होती है।

  • 5. सिंगल या मल्टीपल प्रेगनेंसी: इस टेस्ट से यह भी साफ हो जाता है कि गर्भ में एक बच्चा है या जुड़वां (Twins) या ट्रिपलेट्स।

पेट का स्कैन (TAS) या आंतरिक स्कैन (TVS): कैसे होता है यह टेस्ट?

शुरुआती प्रेगनेंसी में अल्ट्रासाउंड दो तरीकों से किया जा सकता है:

  • ट्रांस-एब्डोमिनल स्कैन (TAS): इसमें पेट पर जेल लगाकर प्रोब घुमाया जाता है। इसके लिए महिला का ब्लैडर (मूत्राशय) पूरी तरह भरा होना जरूरी होता है, इसलिए टेस्ट से 30-40 मिनट पहले 3-4 गिलास पानी पीने को कहा जाता है ताकि भरा हुआ मूत्राशय गर्भाशय को ऊपर उठाए और स्पष्ट तस्वीर दिखे।

  • ट्रांस-वेजाइनल स्कैन (TVS): 6 से 7 सप्ताह के शुरुआती चरण में जब भ्रूण चावल के दाने जितना छोटा होता है, तब स्पष्ट विजुअल और दिल की धड़कन देखने के लिए डॉक्टर TVS स्कैन करते हैं। इसमें एक पतली, स्टेराइल प्रोब को योनि मार्ग से डाला जाता है। यह प्रक्रिया पूरी तरह सुरक्षित और दर्दरहित होती है, और इससे बच्चे या गर्भ को कोई नुकसान नहीं पहुंचता।

अल्ट्रासाउंड कराने जाते समय इन बातों का रखें ध्यान

  • यदि डॉक्टर ने पेट के स्कैन की सलाह दी है, तो पर्याप्त पानी पिएं ताकि पेशाब रोकने में असहजता न हो लेकिन ब्लैडर भरा रहे।

  • ढीले और आरामदायक कपड़े पहनें (जैसे सलवार-कुर्ता या टू-पीस ड्रेस) ताकि पेट की जांच में आसानी हो।

  • अपने अंतिम मासिक धर्म (LMP) की सही तारीख याद रखें या डायरी/ऐप में नोट करके साथ ले जाएं।

  • यदि डॉक्टर को पहले स्कैन में दिल की धड़कन हल्की दिखती है या स्पष्ट नहीं होती, तो घबराएं नहीं; कई बार ओव्यूलेशन देर से होने के कारण गर्भ की वास्तविक उम्र कम होती है, जिसके लिए डॉक्टर 7 से 10 दिन बाद दोबारा स्कैन की सलाह देते हैं।