Hartalika Teej Ganesh Chaturthi: हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी क्या एक ही दिन है? डेट का कन्फ्यूजन हुआ दूर

Published on 10 सित॰ 2026

इस साल हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी दोनों त्योहारों की तारीख को लेकर बहुत कन्फ्यूजन है. हिंदू पंचांग के अनुसार, हरतालिका तीज भादो शुक्ल तृतीया तिथि को आता है. जबकि गणेश चतुर्थी का पर्व भादो शुक्ल चतुर्थी को मनाया जाता है. ऐसे में दोनों त्योहार 14 सितंबर को एकसाथ मनाए जाने की बात पर लोग कन्फ्यूज हैं. आइए आपको बताते हैं कि दोनों त्योहारों की सही तारीख क्या रहने वाली है. और इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त क्या रहेगा.

क्यों एक ही दिन मनाए जाएंगे दोनों त्योहार?
हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल भादो शुक्ल तृतीया 13 सितंबर की सुबह 7:08 बजे शुरू होगी. इसका समापन 14 सितंबर की सुबह 7:06 बजे होगा. इसके बाद चतुर्थी तिथि लग जाएगी. भादो शुक्ल चतुर्थी तिथि 14 सितंबर को सुबह 07.07 बजे से लेकर 15 सितंबर को सुबह 07.44 बजे तक रहने वाली है. ऐसे में उदया तिथि के आधार पर हरतालिका तीज का व्रत 14 सितंबर को रखा जाएगा. वहीं गणेश चतुर्थी पर उदया तिथि के साथ-साथ मध्याह्न काल का भी विशेष महत्व बताया गया है. इसलिए गणेश चतुर्थी भी 14 सितंबर को ही मनाई जाएगी.

हरतालिका तीज 2026 शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 4:32 बजे से 5:19 बजे तक
सर्वोच्च मुहूर्त- सुबह 6:05 बजे से 7:06 बजे तक
शाम की पूजा का मुहूर्त- शाम 06:28 बजे से शाम 07:37 बजे तक
पारण का समय- 15 सितंबर को सूर्योदय से लेकर सुबह 07.44 बजे तक

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हरतालिका तीज पूजन विधि
हरतालिका तीज पर सुबह स्नान करने के बाद व्रत और पूजा का संकल्प लें. इसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा करें. दिनभर पूजा-पाठ करें. हरतालिका तीज की कथा सुनें और मंत्रों का जाप करें. शाम के समय मिट्टी से भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा तैयार करें. गोबर से भगवान गणेश की आकृति बनाएं. प्रदोष काल में तीनों की विधिवत पूजा करें. सुहागिन महिलाएं इस दिन सोलह श्रृंगार करें. माता पार्वती को भी सुहाग की सामग्री अर्पित करें. पूजा में नए वस्त्र, बांस का सूप, डलिया, श्रृंगार का सामान, धूप, दीप, नैवेद्य, फल और सफेद मिठाई चढ़ाएं. पूजा पूरी होने के बाद भगवान शिव और माता पार्वती की आरती करें. अंत में हरतालिका तीज की कथा सुनें और भगवान के मंत्रों का जाप करें.

गणेश चतुर्थी 2026 शुभ मुहूर्त
अभिजीत मुहूर्त- 11:52 बजे से दोपहर 12:41 बजे तक
अमृत काल- दोपहर- 01.43 बजे से लेकर दोपहर 03.14 बजे तक

गणेश चतुर्थी 2026 पूजन विधि
अगर आपने गणेश महोत्सव के दौरान घर में भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित की है, तो सुबह और शाम दोनों समय पूजा करना शुभ माना जाता है. पूजा के दौरान दीपक जलाएं और गणपति बप्पा की आरती करें. भगवान गणेश को पीले फूल और दूर्वा जरूर अर्पित करें. इसके बाद उन्हें भोग लगाएं और आरती करें. गणेश महोत्सव के दिनों में घर की पवित्रता और सात्विकता का विशेष ध्यान रखना चाहिए. इस दौरान खान-पान भी सात्विक रखने की परंपरा है. घर में गणपति की स्थापना करने वाले भक्तों को इन दिनों प्याज, लहसुन, मांस और मदिरा से परहेज करना चाहिए.

भोजन तैयार करने के बाद सबसे पहले भगवान गणेश को भोग लगाएं. इसके बाद भोजन को प्रसाद मानकर ग्रहण करें. गणेश महोत्सव का समापन अनंत चतुर्दशी पर होता है. इसी दिन गणपति बप्पा की प्रतिमा का विसर्जन किया जाता है. भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार इस दिन व्रत रखते हैं. इसके बाद पूजा करके गणपति विसर्जन में शामिल होते हैं.

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