चीन ने बनाया दुनिया का सबसे छोटा स्कैनर, जानिए क्या-क्या होगा स्कैन?

Published on 16 सित॰ 2026

चीन ने बनाया दुनिया का सबसे छोटा स्कैनर, जानिए क्या-क्या होगा स्कैन?

सबसे छोटी सिटी स्कैन की मशीन

चीन के साइंटिस्ट्स ने दुनिया की सबसे छोटी और सबसे हल्की CT मशीन बना दी है. इसका नाम है Xtomo-Cube, जिसका साइज करीब एक डेस्कटॉप स्पीकर जितना है और वजन सिर्फ 6 किलो है. यानी इसे एक हाथ में उठाकर आराम से कहीं भी ले जाया जा सकता है. इसे शानदोंग प्रांत की कंपनी Rayim ने बनाया है और यही वजह है कि इसे “पाम-साइज्ड CT स्कैनर” यानी हथेली जितनी छोटी CT मशीन कहा जा रहा है. आइए आपको इसके बारे में पूरी डिटेल बताते हैं. इसकी क्या खूबी है और क्या-क्या स्कैन करेगा सबकुछ जानते हैं.

Rayim के सीनियर इंजीनियर और जनरल मैनेजर लियू बाओदोंग के मुताबिक, इस मशीन की स्पेशियल रिजॉल्यूशन 80 माइक्रोमीटर की है, यानी करीब इंसान के बाल जितनी बारीक चीजें भी साफ दिख जाती हैं. यह छोटी-छोटी चीजों को स्कैन करने के लिए बनाई गई है, जैसे घोंघे का खोल, पुराने फॉसिल, प्राचीन सामान और यहां तक कि दवाई के कैप्सूल भी. सबसे खास बात यह है कि यह मशीन सिर्फ 200 वॉट बिजली में चल जाती है, यानी फील्ड वर्क के दौरान इसे एक साधारण पावर बैंक से भी चलाया जा सकता है. लियू बाओदोंग ने यह भी बताया कि इस मशीन के सभी मुख्य पार्ट्स जैसे X-ray सोर्स, घूमने वाला प्लेटफॉर्म और डिटेक्टर पूरी तरह चीन में ही डिजाइन और तैयार किए गए हैं.

Ct Scan Machineक्या-क्या होगा स्कैन?

चीन का यह 6 किलो वाला कॉम्पैक्ट CT स्कैनर मुख्य रूप से छोटे ऑब्जेक्ट्स और रिसर्च सैंपल्स की अंदरूनी स्ट्रक्चर देखने के लिए बनाया गया है. इससे फॉसिल, हड्डियों, आर्कियोलॉजिकल ऑब्जेक्ट्स और दूसरे छोटे साइंटिफिक सैंपल्स की बिना तोड़े अंदर से जांच की जा सकती है. खास बात यह है कि इसे बड़े CT सेटअप की तुलना में आसानी से एक जगह से दूसरी जगह ले जाया जा सकता है. हालांकि, इसे फिलहाल इंसानों का मेडिकल CT स्कैन करने वाली मशीन समझना सही नहीं होगा. इसके लिए क्लीनिकल यूज और ह्यूमन स्कैनिंग की क्षमता अलग से साबित करनी होगी.

इससे पहले सबसे छोटी CT मशीन का रिकॉर्ड जर्मनी की एक डिवाइस के नाम था, जिसका वजन 19 किलो था. यानी चीन की यह नई मशीन उससे तीन गुना से भी ज्यादा हल्की है. बता दें कि CT यानी कंप्यूटेड टोमोग्राफी में अलग-अलग एंगल से X-ray लेकर किसी चीज के अंदर की बनावट की तस्वीरें खींची जाती हैं और फिर कंप्यूटर इन तस्वीरों को जोड़कर एक डिटेल्ड 3D मॉडल तैयार कर देता है. पहली बार 1971 में लंदन में एक मरीज की क्लीनिकल CT स्कैनिंग हुई थी, जिससे ब्रेन ट्यूमर का पता चला था. उस समय की मशीन करीब 3 मीटर लंबी थी और सिर्फ सिर को स्कैन कर पाती थी, वो भी दो तस्वीरें बनाने में पूरे 5 मिनट लगते थे.

CT की दुनिया की कॉम्पैक्ट कार

आज के समय में हॉस्पिटल्स में CT स्कैनर का इस्तेमाल ट्यूमर, इंटरनल ब्लीडिंग और चोटों का पता लगाने के लिए रोजाना होता है, लेकिन ये मशीनें आमतौर पर बहुत बड़ी और भारी होती हैं. करीब 2 मीटर ऊंची-चौड़ी और वजन में लगभग 2 टन तक. लियू बाओदोंग का कहना है कि कि CT स्कैनर की भी उतनी ही किस्में हैं जितनी गाड़ियों की होती है. स्पोर्ट्स कार से लेकर ट्रक तक. हमारी यह मशीन CT की दुनिया की कॉम्पैक्ट कार है, यह हर चीज को स्कैन करने के लिए नहीं बनी, बल्कि छोटी चीजों के अंदर झांकने के लिए बनाई गई है. उन्होंने बताया कि सबसे बड़ी चुनौती यही थी कि X-ray सोर्स, डिटेक्टर और रोटेटिंग प्लेटफॉर्म को सिर्फ 4 लीटर की जगह में फिट किया जाए, वो भी बिना इमेज क्वालिटी से समझौता किए हुए.

इस छोटी मशीन का एक और फायदा यह है कि इसकी लो-एनर्जी X-ray की वजह से इसे यूनिवर्सिटी क्लासरूम्स और रिसर्च लैब्स में भी इस्तेमाल किया जा सकता है. ज्यादातर कमर्शियल CT सिस्टम्स के उलट, इस मशीन की सेटिंग्स और रॉ इमेजिंग डेटा यूजर्स के लिए खुले रखे गए हैं, जिससे स्टूडेंट्स और रिसर्चर्स यह एक्सपेरिमेंट कर सकते हैं कि CT इमेजेस कैसे कलेक्ट, री-कंस्ट्रक्ट और बेहतर बनाई जाती हैं.

देवेश कुमार पांडेय

देवेश कुमार पांडेय

देवेश कुमार पांडेय TV9 Hindi में बतौर सब-एडिटर काम कर रहे हैं. उत्तर प्रदेश के अमेठी के रहने वाले देवेश को राजनीति के अलावा इतिहास, साहित्य में दिलचस्पी है.  साल 2024 में भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC) के अमरावती कैंपस से पत्रकारिता की पढ़ाई की है. देवेश को घूमना, लिखना, पढ़ना और पॉडकास्ट सुनना पसंद है.

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