समोसे से लेकर कोल्ड ड्रिंक तक, स्कूलों के पास जंक फूड पर क्यों लग रहा है बैन? क्या है इसके पीछे की वजह?
Published: Thursday, September 24, 2026, 16:13 [IST]
FSSAI Junk Food Ban: स्कूल की छुट्टी होते ही बच्चों की भीड़ अक्सर कैंटीन या स्कूल के बाहर लगी दुकानों पर नजर आती है। किसी को कुरकुरे पसंद हैं तो कोई चिप्स, चॉकलेट, कोल्ड ड्रिंक, समोसा या बर्गर खाने पहुंच जाता है। लेकिन अब स्कूलों के आसपास जंक फूड की बिक्री पर रोक लग सकती है। बच्चों में बढ़ते मोटापे को देखते हुए सरकार हाई फैट, शुगर और सॉल्ट यानी HFSS वाले खाद्य पदार्थों की बिक्री को लेकर नए नियम पर काम कर रही है।
प्रस्ताव के तहत स्कूलों के 50 मीटर के दायरे में ऐसे खाद्य पदार्थ बेचने पर रोक लगाने की योजना है। अगर यह प्रस्ताव लागू होता है, तो देश के करीब 15 लाख स्कूलों के आसपास की दुकानों और ठेलों पर इसका असर देखने को मिल सकता है।
स्कूल के पास जंक फूड पर रोक की तैयारी
फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) ने बच्चों के लिए खाने को लेकर यह प्रस्ताव तैयार किया है। इसके तहत स्कूलों के 50 मीटर के दायरे में आने वाली दुकानों और ठेलों पर HFSS वाले खाद्य पदार्थों की बिक्री रोकी जा सकती है। इसमें चिप्स, कोल्ड ड्रिंक, चॉकलेट, पिज्जा, बर्गर और इसी तरह के ज्यादा फैट, चीनी या नमक वाले प्रोडक्ट शामिल हो सकते हैं।
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FSSAI के मुख्य कार्यकारी रजित पुन्हानी के मुताबिक, इस कदम का मकसद बच्चों को कम उम्र से ही हेल्दी खाने की आदत डालना है। दुकानदारों को नॉन-HFSS यानी हेल्दी खाद्य पदार्थ बेचने की अनुमति रहेगी।
15 लाख स्कूलों पर पड़ेगा असर
प्रस्ताव का दायरा देशभर के करीब 15 लाख स्कूलों तक बताया जा रहा है। यानी नियम लागू होने पर स्कूलों के आसपास मौजूद बड़ी संख्या में दुकानदारों को अपने सामान में बदलाव करना पड़ सकता है। स्थानीय दुकानदारों के साथ बड़ी खाद्य और पेय कंपनियों की ओर से भी इस प्रस्ताव को लेकर चिंता जताई जा रही है। वहीं, सरकार का फोकस बच्चों को ज्यादा पौष्टिक खाना उपलब्ध कराने पर है।
4.1 करोड़ बच्चों का वजन बढ़ा
बच्चों में मोटापे की बढ़ती समस्या इस पहल की बड़ी वजह है। वर्ल्ड ओबेसिटी फेडरेशन के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में 5 से 19 साल की उम्र के ओवरवेट या मोटापे से प्रभावित बच्चों की संख्या 2015 में करीब 2.8 करोड़ थी। 2025 में यह बढ़कर करीब 4.1 करोड़ हो गई। अनुमान है कि 2040 तक यह संख्या बढ़कर करीब 5.6 करोड़ हो सकती है। ऐसे में बच्चों की खाने की आदतों और स्कूलों के आसपास मिलने वाले खाद्य पदार्थों पर ध्यान बढ़ाया जा रहा है।
सस्ते जंक फूड की बढ़ी पहुंच
बच्चों के बीच जंक फूड की लोकप्रियता के पीछे कम कीमत और आसानी से उपलब्ध होना भी एक वजह है। बाजार में 49 रुपये जैसे कम दाम में पिज्जा और दूसरे फास्ट फूड मिल जाते हैं। पेप्सिको, कोका-कोला, मोंडेलिज़ और नेस्ले जैसी बड़ी कंपनियों के पैक्ड फूड और ड्रिंक भी बच्चों के बीच लोकप्रिय हैं। सरकार के प्रस्ताव का मकसद ऐसे उत्पादों की स्कूलों के आसपास उपलब्धता कम करना है।
महाराष्ट्र में भी कार्रवाई
स्कूलों के पास जंक फूड की बिक्री को लेकर महाराष्ट्र में भी कदम उठाए गए हैं। राज्य में स्कूलों के आसपास ऐसे सामान बेचने वाली दुकानों पर कार्रवाई शुरू होने की जानकारी सामने आई है।
चिली में सख्त नियम का उदाहरण
जंक फूड को लेकर चिली के नियमों का भी उदाहरण दिया जा रहा है। वहां बच्चों को ध्यान में रखते हुए ऐसे खाद्य पदार्थों और उनकी मार्केटिंग पर सख्त नियम लागू किए गए हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, इन नियमों के बाद बच्चों में वजन बढ़ने की समस्या में कमी देखने को मिली।
भारत में प्रस्ताव लागू होने पर दुकानदारों के साथ खाद्य कंपनियों पर भी असर पड़ सकता है। कंपनियों पर कम फैट, चीनी और नमक वाले प्रोडक्ट तैयार करने का दबाव बढ़ सकता है।
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