नया क्यों खरीदें? प्री-लव्ड का क्रेज बढ़ा, बदल रही है खरीदारी की सोच

Published on 13 अक्टू॰ 2026

नया क्यों खरीदें? प्री-लव्ड का क्रेज बढ़ा, बदल रही है खरीदारी की सोच

प्री लव्ड प्रोडक्ट शॉपिंग ट्रेंड Image Credit source: Getty Images

नया फोन, नए कपड़े, नया फर्नीचर अब हर चीज नई ही हो, यह जरूरी नहीं. भारत में खासकर यंग जनरेशन पुरानी चीजों को नए नजरिए से देख रहे हैं. सेकेंड हैंड फोन से लेकर विंटेज जैकेट और प्री-ओन्ड घड़ी तक, प्री-लव्ड, रीसेल और थ्रिफ्ट अब सिर्फ ट्रेंडिंग शब्द नहीं, खरीदारी की बदलती आदत बन रहे हैं.

अक्टूबर 2026 में आया गूगल डाटा कहता है कि भारत में हाउ टू थ्रिफ्ट की सर्च एक साल में 850 फीसदी बढ़ी. थ्रिफ्ट स्टोर नियर मी की सर्च करीब 600 फीसदी बढ़ी. दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नई, कोलकाता, कोच्चि और देहरादून जैसे शहरों में लोगों ने इसमें बहुत इंटरेस्ट लिया. थ्रिफ्टिंग अब सिर्फ सोशल मीडिया स्टोर्स तक सीमित नहीं है.

पुराना फोन, लेकिन प्रीमियम

री-कॉमर्स का सबसे बड़ा असर स्मार्टफोन बाजार में दिखाई दे रहा है. काउंटरपॉइंट की रिसर्च बताती है 2026 की पहली छमाही में भारत में रीफर्बिश्ड यानी सेकेंड हैंड स्मार्टफोन की बिक्री 13 फीसदी बढ़ी, और इसी दौरान नए स्मार्टफोन की बिक्री करीब 11 फीसदी घटी.

कंज्यूमर को सिर्फ सस्ते फोन की तलाश नहीं, बल्कि आईफोन 13, आईफोन 14 और सैमसंग गैलेक्सी एस 21, एस 22 और एस 23 जैसे प्रीमियम मॉडल भी सेकेंडरी मार्केट में मांग में हैं. 2026 की पहली छमाही में रीफर्बिश्ड स्मार्टफोन बाजार में सैमसंग की करीब 30 फीसदी और एप्पल की 23 फीसदी हिस्सेदारी रही.

कबाड़ी से क्लिक तक पहुंचा सेकेंड हैंड बाजार कभी सेकेंड हैंड सामान खरीदने का मतलब लोकल बाजार, दुकानदार से मोलभाव और सामान की हालत पर भरोसा करना था. अब बायबैक, एक्सचेंज, टेस्टिंग, वारंटी और ऑनलाइन रीसेल ने इसका स्टाइल ही बदल दिया है.

हालांकि इस बाजार का बड़ा हिस्सा अब भी अनऑर्गनाइज्ड है. काउंटरपॉइंट के हिसाब से भारत के रीफर्बिश्ड स्मार्टफोन बाजार का 80 फीसदी हिस्सा अनऑर्गेनाइज्ड चैनलों के पास है. ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और कंपनियों के लिए यहां एक्सपेंशन की बड़ी गुंजाइश है.

Pre Loved Products Trend How Young Consumers Are Changing Shopping Habits

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कपड़े भी हुए प्री-लव्ड

सिर्फ मोबाइल नहीं, फैशन में भी हर पुरानी चीज को नया नाम और नया मार्केट मिल रहा है. सोशल मीडिया पर थ्रिफ्ट स्टोर कपड़े, जैकेट, बैग, जूते और एक्सेसरीज बेच रहे हैं. सिर्फ कम कीमत ही नहीं, विंटेज डिजाइन, यूनिक पीस और लो कॉस्ट में यूनिक दिखने की चाह में भी इन्हें पसंद कर रहे हैं. मतलब थ्रिफ्टिंग में कम कीमत के साथ एक्सक्लूसिविटी भी बिक रही है.

क्या कहते हैं मार्केट एक्सपर्ट?

सीनियर इकोनॉमिस्ट आकाश जिंदल कहते हैं भारत के कंज्यूमर का टेस्ट और बिहेवियर ग्लोबल हुआ है. लिबरलाइजेशन के बाद अब जब यूथ विदेश जाता है, तो वहां देखता है कि यूके और यूएस में यूटिलिटी को इंपॉर्टेंस दी जाती है. यहां लोगों में कुछ खरीदते हुए लगता था कि लोग क्या कहेंगे. अब फॉरेन कल्चर आया है. अब लोग यूटिलिटी और वैल्यू फॉर मनी देखते हैं. नई चीज 10 हजार की और दो महीने पुरानी 5 हजार की मिल रही है, तो लोग 5 हजार बचा लेते हैं. एक्सेप्टेबिलिटी बन रही है, इसलिए बड़े ब्रांड भी जुड़ते हैं.

आकाश कहते हैं ये अच्छा है, “लोग मात्र दिखावे के लिए नहीं खरीदते. कार मार्केट में भी सेकेंड हैंड कार के लिए बड़ी-बड़ी कंपनियां आ गई हैं. ये इवोल्यूशन है.” जिंदल के मुताबिक, जिनके लिए उनका सामान अब काम का, यूटिलिटी का नहीं रहा, उनको अब बढ़िया एग्जिट रूट मिल रहा है. ये रीसेल कल्चर कस्टमर, सेल्स ऑर्गनाइजेशन और एग्जिट रूट ढूंढने वालों के लिए ओवरऑल सबके लिए अच्छा है.

जेब बचाने से आगे की कहानी

री-कॉमर्स को बढ़ाने में महंगाई का असर भी है. नया प्रीमियम फोन खरीदने के बजाय कम कीमत में अच्छी हालत और वारंटी वाला पुराना मॉडल मिल जाए, तो ग्राहक इसे बेहतर सौदा मानता है. कहानी सिर्फ जेब की नहीं, पर्यावरण की भी है. रेडसीर के मुताबिक, भारत में ई-वेस्ट एफवाई14 के करीब 2 मिलियन मीट्रिक टन से बढ़कर एफवाई24 में करीब 4 मिलियन मीट्रिक टन हो चुका है. पुराने इलेक्ट्रॉनिक्स का इस्तेमाल बढ़ाना और उन्हें रीसेल या रीसायकल करना ई-कचरा कम करने की दिशा में एक रास्ता हो सकता है.

बढ़ते बाजार के साथ भरोसे का सवाल

री-कॉमर्स का बाजार बढ़ रहा है, लेकिन जोखिम भी हैं. सेकेंड हैंड फोन खरीदते समय बैटरी, स्क्रीन, आईएमईआई, नकली पार्ट्स, चोरी के डिवाइस और वारंटी की जांच जरूरी है. कपड़ों में ब्रांड की असलियत और क्वालिटी का सवाल भी रहता है. इस बाजार में भरोसा सबसे बड़ी करेंसी है.

कभी सेकेंड हैंड खरीदना मजबूरी समझा जाता था. अब री-कॉमर्स इसे स्मार्ट शॉपिंग, वैल्यू फॉर मनी और सस्टेनेबिलिटी से जोड़ रहा है. खरीदारी की सोच बदल रही है. अब नया होना ही अच्छी डील की एकमात्र शर्त नहीं है.

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प्रमिला दीक्षित

प्रमिला दीक्षित

दो दशक से पत्रकारिता में सक्रिय... कश्मीर से केदारनाथ और काशी तक, अपराध से आतंकवाद तक, दंगों की क्रूरता से दरियादिली की कहानी तक, राजनीति से साहित्य की रवानी तक, तथ्य, तर्क और संवेदना के साथ हर विषय पर रिपोर्टिंग करती रही हैं. वीडियो, रेडियो, ब्लॉग- लेख, कविता और मॉडरेशन उनकी अभिव्यक्ति के माध्यम है.

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