भोपाल, 13 अक्टूबर 2026: हम हमेशा कहते हैं कि कोई किसी का जाति या धर्म के नाम पर शोषण नहीं करता बल्कि नियम का पालन और वचन का मान रखने वाले हर व्यक्ति का धोखेबाज लोगों द्वारा शोषण किया जाता है। आज से पहले आपने सुना होगा कि मुख्यमंत्री ने कर्मचारियों को आश्वासन दिया और पूरा नहीं किया आज हम आपको बताते हैं कि, पटवारियों ने मुख्यमंत्री को आश्वासन दिया और पूरा नहीं किया। मतलब मुख्यमंत्री को धोखा दे दिया।
पटवारियों ने मुख्यमंत्री को धोखा दे दिया
9 अक्टूबर की शाम मध्य प्रदेश सरकार और पटवारी संघ के बीच सहमति बन गई थी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात के बाद संघ ने 12 अक्टूबर से योजना का काम शुरू करने का ऐलान किया था। इस मीटिंग में पटवारी संघ ने अपनी चिंता व्यक्त की थी की रजिस्ट्री पर हस्ताक्षर करने से उनकी नौकरी खतरे में पड़ जाएगी। उनकी चिंता को दूर करने के लिए मुख्यमंत्री के निर्देश पर राजस्व विभाग द्वारा भारतीय न्याय संहिता की धारा 218 के तहत आदेश भी जारी कर दिया गया। मतलब मुख्यमंत्री ने जो आश्वासन दिया था वह पूरा किया, और 24 घंटे के अंदर पूरा किया लेकिन पटवारी काम पर नहीं लौटे। पटवारियों ने मुख्यमंत्री को झूठा आश्वासन दे दिया।
मध्य प्रदेश के पटवारी, आदतन रिश्वतखोर होते हैं?
मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा पटवारी के खिलाफ रिश्वतखोरी की शिकायत सामने आती हैं। सबसे ज्यादा शिकायत मंगलवार को जनसुनवाई के दौरान दर्ज की जाती है। इसके अलावा सीएम हेल्पलाइन में भी पटवारियों के खिलाफ शिकायतों का अंबार लगा हुआ है। सिर्फ इतना ही नहीं लोकायुक्त द्वारा की गई कार्रवाई में भी सबसे ज्यादा पटवारी पकड़े जाते हैं। नामांतरण, ऋण पुस्तिका, रिकॉर्ड में नाम दर्ज करना इत्यादि प्रत्येक काम के लिए पटवारी रिश्वत वसूल करते हैं। जबकि उनका सातवां वेतनमान के तहत लगभग 1 लाख रुपए वेतन मिलता है। जिस काम के लिए वेतन मिलता है इस काम के बदले रिश्वत भी लेते हैं।
स्वामित्व योजना का विरोध क्यों
इस योजना के तहत पटवारियों को फ्री में रजिस्ट्री कर रही है। दिन भर काम भी करना पड़ेगा और बदले में रिश्वत भी नहीं मिलेगी। बस यही एक मात्र, प्रथम और अंतिम कारण है जो पटवारी, हड़ताल कर रहे हैं। आंदोलन करने वाले पटवारी का कहना है कि इस योजना के कारण उनकी नौकरी करते हुए पड़ जाएगी, जबकि उनकी नौकरी हर रोज खतरे में होती है, क्योंकि वह साल में 365 से ज्यादा बार रिश्वत लेते हैं। कई बार तो एसडीएम और कलेक्टर के नाम पर रिश्वत की वसूली करते हैं। सबसे सामान्य और नियम के अनुसार काम के लिए 2000 से लेकर 100000 रुपए तक की रिश्वत ली जाती है। पटवारी यह नहीं देखे कि, नियम क्या कहते हैं बल्कि हुई यह देखते हैं कि सामने वाले की, मतलब जनता की जरूरत क्या है। जिसका काम जितना जरूरी होता है, उससे उतनी अधिक रिश्वत ली जाती है।
यदि इस योजना में से एक साथ रजिस्ट्री करने का फीचर हटा दिया जाए और पटवारियों को 2028 तक रजिस्ट्री करने की छूट दे दी जाए तो यकीन मानिए किसी पटवारी को कोई समस्या नहीं होगी। फिर उसको किसी भी प्रकार से अपनी नौकरी खतरे में दिखाई नहीं देगी।
