पेपर लीक के मामलों को लेकर छात्रों और युवाओं का आक्रोश अब सड़कों पर दिखाई देने लगा है। शुक्रवार को अजमेर के बजरंगगढ़ चौराहे पर सीजेपी (CJP) समर्थक छात्रों और आम आदमी पार्टी (AAP) के कार्यकर्ताओं ने संयुक्त रूप से प्रदर्शन किया। हाथों में तख्तियां लेक
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प्रदर्शन के दौरान छात्रों के हाथों में मौजूद पोस्टरों ने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींचा। एक पोस्टर पर लिखा था- नेताओं के बच्चे पढ़ें इंटरनेशनल, हमारे बच्चे एंटी-नेशनल, वहीं दूसरे पोस्टर पर शिक्षा व्यवस्था पर तीखा तंज कसते हुए लिखा गया-एक दिन एजुकेशन रिजाइन कर देगा, मिनिस्टर रह जाएगा। इन अनोखे नारों के जरिए छात्रों ने लगातार हो रहे पेपर लीक और देश की शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए।

हाथों में तख्तियां लेकर पहुंचे छात्रों ने केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग उठाई।
बच्चे मेहनत करें और पेपर लीक हो जाए, आखिर कब तक? प्रदर्शन में शामिल छात्रा एंजेल ने कहा कि उनकी मांग बिल्कुल स्पष्ट है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दें। उन्होंने कहा कि अब लगभग हर बड़ी परीक्षा में पेपर लीक होने की घटनाएं सामने आने लगी हैं। छात्र महीनों तक कड़ी मेहनत करते हैं, लेकिन परीक्षा से पहले ही उनका भविष्य दांव पर लग जाता है।
आक्रोश व्यक्त करते हुए एंजेल ने कहा- पेपर लीक के कारण अब तक कितने ही छात्र आत्महत्या कर चुके हैं। उनके माता-पिता पर क्या बीतती होगी, क्या कोई यह सोचता भी है? सरकार सिर्फ बातें करती है, लेकिन पेपर लीक रोकने के लिए ठोस कदम क्यों नहीं उठाए जाते? जब व्यवस्था संभल नहीं रही, तो जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा क्यों नहीं दे दिया जाता?

CJP समर्थक छात्रों और आम आदमी पार्टी (AAP) के कार्यकर्ताओं ने संयुक्त रूप से प्रदर्शन किया।
नेताओं के बच्चे विदेश पढ़ते हैं, आम युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ बंद हो"
प्रदर्शन में शामिल छात्रा अनुष्का भटनागर ने कहा- वह किसी राजनीतिक दल के समर्थन में नहीं हैं, बल्कि उन लाखों छात्रों की आवाज उठा रही हैं जिनका भविष्य पेपर लीक से प्रभावित हुआ है। नेताओं के बच्चे विदेशों और बड़े संस्थानों में पढ़ाई करते हैं, जबकि आम परिवारों के बच्चों को बार-बार पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने का नुकसान झेलना पड़ता है।
अनुष्का ने कहा- बच्चे रोए हैं, उनकी जिंदगी बर्बाद हुई है। इसके लिए सरकार जिम्मेदार है। जनता से भारी टैक्स लिया जाता है, लेकिन युवाओं को पारदर्शी परीक्षाएं और रोजगार तक नहीं मिल पा रहा है।