Updated: Tuesday, July 14, 2026, 12:00 [IST]
Prashant Kishor Educational Qualification: जनसुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के लिए नामांकन दाखिल कर दिया है। इसके साथ ही उनके चुनावी हलफनामे में पहली बार उनकी पूरी शैक्षणिक योग्यता भी सामने आई है। हलफनामे में उन्होंने हैदराबाद के Administrative Staff College of India (ASCI) से मास्टर ऑफ हेल्थकेयर मैनेजमेंट (MHA) करने की जानकारी दी है।
इसके बाद सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने दावा करना शुरू कर दिया कि ASCI को मास्टर डिग्री देने का अधिकार ही नहीं है, इसलिए पीके की पोस्ट ग्रेजुएशन डिग्री फर्जी है। लेकिन जब इस दावे की पड़ताल की गई तो मामला कुछ और ही निकला। आइए जानते हैं कि यह विवाद क्यों खड़ा हुआ और वायरल दावे में कितनी सच्चाई है।
हलफनामे में पहली बार सार्वजनिक हुई पूरी शैक्षणिक योग्यता
बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के लिए दाखिल चुनावी हलफनामे में प्रशांत किशोर ने अपनी पूरी शैक्षणिक पृष्ठभूमि का विवरण दिया है। हलफनामे के अनुसार उन्होंने 1991 में बिहार विद्यालय परीक्षा समिति से संबद्ध एम.पी. हाई स्कूल, बक्सर से मैट्रिक पास की। इसके बाद 1993 में पटना साइंस कॉलेज से इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी की। आगे उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (BBA) की डिग्री हासिल की। इसके अलावा हैदराबाद के एडमिनिस्ट्रेटिव स्टाफ कॉलेज ऑफ इंडिया (ASCI) से मास्टर ऑफ हेल्थकेयर मैनेजमेंट (MHA) और वर्ष 2010 में फ्रांस के CAVILAM Vichy से इंटेंसिव फ्रेंच लैंग्वेज कोर्स भी किया।

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Prashant Kishor Degree: सोशल मीडिया पर किस दावे को लेकर शुरू हुआ विवाद?
हलफनामा सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर कुछ यूजर्स ने दावा किया कि प्रशांत किशोर ने जिस Administrative Staff College of India (ASCI) से पोस्ट ग्रेजुएशन करने की बात कही है, वह कोई विश्वविद्यालय नहीं बल्कि केवल एक ट्रेनिंग संस्थान है। पोस्ट में यह भी कहा गया कि एएससीआई को मास्टर डिग्री देने का अधिकार नहीं है और वहां केवल विभिन्न कंपनियों व संस्थानों के कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जाता है। इसी आधार पर उनकी MHA डिग्री की वैधता पर सवाल उठाए जाने लगे और इसे भ्रामक तरीके से प्रस्तुत किया गया।
क्या सचमुच ASCI मास्टर डिग्री नहीं दे सकता?
सोशल मीडिया पर कुछ लोग दावा कर रहे हैं कि ASCI (Administrative Staff College of India) सिर्फ एक ट्रेनिंग सेंटर है और उसे मास्टर डिग्री देने का अधिकार नहीं है। लेकिन यह दावा पूरी तरह सही नहीं है। ASCI की स्थापना 1956 में हुई थी और यह हैदराबाद का एक प्रतिष्ठित प्रबंधन संस्थान है। यह भारत सरकार के सहयोग से स्थापित संस्थान है, जहां वर्षों से मैनेजमेंट, प्रशासन और पब्लिक पॉलिसी से जुड़े प्रोफेशनल कोर्स चलाए जाते हैं। इसके कई तकनीकी और मैनेजमेंट प्रोग्राम AICTE से मंजूर रहे हैं। इसलिए यह कहना कि ASCI सिर्फ ट्रेनिंग देता है और वहां से किया गया हर पोस्ट ग्रेजुएट प्रोग्राम फर्जी या अमान्य है, भ्रामक दावा है। किसी भी डिग्री की वैधता उसके संबंधित कोर्स और उसकी मंजूरी पर निर्भर करती है, न कि केवल ऐसे सामान्य दावों पर।
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UGC और AICTE को लेकर क्यों होता है भ्रम?
अक्सर लोग UGC और AICTE की भूमिका को लेकर भ्रमित हो जाते हैं। हर कॉलेज का सीधे UGC से मान्यता प्राप्त होना जरूरी नहीं होता। कई संस्थान किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से जुड़े होते हैं, जबकि तकनीकी और मैनेजमेंट कोर्स के लिए AICTE की मंजूरी अहम होती है। यानी अगर कोई संस्थान सीधे UGC की सूची में नहीं है, तो इसका मतलब यह नहीं कि वहां पढ़ाया जाने वाला हर कोर्स या डिग्री अपने आप अमान्य हो जाती है। किसी भी डिग्री की वैधता इस बात पर निर्भर करती है कि वह किस व्यवस्था और किस मंजूरी के तहत दी गई है।