Ram Mandir Donation Case: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश, SIT में अब CA और फॉरेंसिक ऑडिटर भी होंगे शामिल - Haribhoomi

Published on 27 जुल॰ 2026

श्रीराम जन्मभूमि चढ़ावा चोरी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने जांच को और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए बड़ा निर्देश दिया है। कोर्ट ने विशेष जांच टीम में एक चार्टर्ड अकाउंटेंट और फॉरेंसिक ऑडिटर को शामिल करने का आदेश दिया है। साथ ही दो सप्ताह के भीतर SIT से प्रगति रिपोर्ट भी तलब की गई है।

ram mandir supreme court

SC ने SIT को दो सप्ताह के भीतर प्रगति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है।

  • Published: 27 Jul 2026, 04:51 PM IST
  • Last Updated: 27 Jul 2026, 04:52 PM IST

सोमवार को श्रीराम जन्मभूमि चढ़ावा चोरी मामले की सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) की अध्यक्षता वाली पीठ ने जांच के दायरे को और मजबूत करने के निर्देश दिए। अदालत ने कहा कि विशेष जांच टीम (SIT) में एक चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) और फॉरेंसिक ऑडिटर को शामिल किया जाए, ताकि चढ़ावे और वित्तीय लेनदेन की गहन एवं निष्पक्ष जांच की जा सके। सुप्रीम कोर्ट का मानना है कि वित्तीय विशेषज्ञों की भागीदारी से यदि किसी प्रकार की अनियमितता हुई है तो उसकी स्पष्ट तस्वीर सामने आ सकेगी।

CJI बोले- फिलहाल हमारा पूरा ध्यान अच्छी जांच पर है सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि इस समय अदालत का प्रमुख उद्देश्य केवल निष्पक्ष और प्रभावी जांच सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा, "SIT अपना काम करे। फिलहाल हमारा पूरा ध्यान अच्छी जांच पर है। बाकी विषयों पर बाद में विचार किया जाएगा।" कोर्ट ने विस्तारित SIT को जांच जारी रखने और दो सप्ताह के भीतर अपनी प्रगति रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में पेश करने का निर्देश दिया।

वरिष्ठ अधिवक्ता ने उठाया श्रद्धालुओं के दान का मुद्दा
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत ने कहा कि बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने 500 और 1000 रुपये जैसी छोटी-छोटी रकम दान की है, लेकिन लोगों को यह भरोसा होना चाहिए कि उनका पैसा ट्रस्ट तक पहुंचा है। उन्होंने सुझाव दिया कि ट्रस्ट को प्राप्त दान की जानकारी अपनी वेबसाइट पर सार्वजनिक करनी चाहिए, ताकि श्रद्धालु यह देख सकें कि उनका दान सुरक्षित रूप से ट्रस्ट तक पहुंचा है। इस पर अदालत ने कहा कि पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाने चाहिए।

दो सप्ताह बाद होगी अगली सुनवाई
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ ने कहा कि फिलहाल सभी सुझावों को रिकॉर्ड पर लिया जा रहा है और प्राथमिकता जांच को दी जाएगी। कोर्ट ने SIT को दो सप्ताह के भीतर प्रगति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। अगली सुनवाई में रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई पर विचार किया जाएगा।

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने राजनीति से दूर रहने की दी थी नसीहत
इस मामले की पिछली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि जांच निष्पक्ष होनी चाहिए और उसे उसके तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाया जाना चाहिए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि "अदालतें राजनीति करने की जगह नहीं हैं।" सुनवाई के दौरान केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया था कि कोर्ट के पहले के निर्देशों के अनुपालन में सीलबंद लिफाफे में प्रगति रिपोर्ट दाखिल कर दी गई है।