
रावण की कहानीImage Credit source: pexels/magnific
रामायण में रावण को लंका का बेहद शक्तिशाली राजा बताया गया है. वह महान विद्वान था, शिव का परम भक्त था और उसके पास कई तरह की शक्तियां थीं. अपने तप और वरदानों के कारण उसके भीतर अपार आत्मविश्वास था. यही आत्मविश्वास धीरे-धीरे अहंकार में बदल गया. रावण को लगता था कि उसे युद्ध में हराना आसान नहीं है. लेकिन पौराणिक कथाओं में ऐसे कईकहानियां मिलती हैं, जब लंकापति रावण को अपनी शक्ति और अहंकार की कीमत चुकानी पड़ी. खास बात यह है कि भगवान श्री राम से अंतिम युद्ध से पहले भी रावण का सामना कुछ ऐसे महाबलियों से हुआ था, जिन्होंने उसे पराजय का स्वाद चखाया. इन कथाओं में राजा बलि, सहस्रार्जुन यानी कार्तवीर्य अर्जुन, वानरराज बाली और भोलेनाथ का नाम सबसे पहले लिया जाता है.
राजा बलि ने रावण को कैसे हराया?
राजा बलि को पौराणिक कथाओं में दानवीर और बेहद शक्तिशाली राजा के रूप में जाना जाता है. वह पाताल लोक पर भी शासन करते थे. कहा जाता है कि रावण अपनी शक्ति के घमंड में पाताल लोक पहुंचा और वहां राजा बलि से सामना हुआ. रावण ने अपनी शक्ति का प्रदर्शन करते हुए बलि को चुनौती देने की कोशिश की. लेकिन बलि के सामने उसकी ताकत काम नहीं आई. पौराणिक कथा के अनुसार, बलि ने रावण को ऐसा सबक सिखाया कि उसका सारा अभिमान चूर हो गया.
सहस्रार्जुन ने रावण को बना लिया था बंदी
रावण की पराजय से जुड़ा सबसे चर्चित प्रसंग कार्तवीर्य अर्जुन यानी सहस्रार्जुन से जुड़ा है. उन्हें हैहय वंश का शक्तिशाली राजा माना जाता है. पौराणिक कथाओं में उन्हें सहस्रबाहु भी कहा गया है. कहा जाता है कि रावण का सामना कार्तवीर्य अर्जुन से हुआ. दोनों के बीच युद्ध हुआ, लेकिन इस बार रावण को अपनी शक्ति पर घमंड करना भारी पड़ा. कार्तवीर्य अर्जुन ने रावण को पराजित कर बंदी बना लिया. बाद में महर्षि पुलस्त्य ने रावण को मुक्त कराया था.
वानरराज बाली के सामने भी रावण की नहीं चली
रावण और वानरराज बाली की कथा भी बेहद रोचक है. बाली किष्किंधा के शक्तिशाली राजा थे और उन्हें अपनी असाधारण शारीरिक शक्ति के लिए जाना जाता था. पौराणिक कथा के अनुसार, रावण बाली की शक्ति को परखने के लिए उसके पास पहुंचा. कहा जाता है कि रावण ने बाली को युद्ध के लिए चुनौती दी, लेकिन बाली ने उसे आसानी से अपने वश में कर लिया. कुछ कथाओं में वर्णन मिलता है कि बाली ने रावण को अपनी बांह में दबा लिया और लंबे समय तक उसे उसी स्थिति में रखा. आखिरकार उसे बाली की शक्ति स्वीकार करनी पड़ी.
भगवान शिव से भी जुड़ा है रावण की शक्ति की कहानी
रावण भगवान शिव का बहुत बड़ा भक्त माना जाता है. उसके जीवन की कई कथाएं शिव भक्ति से जुड़ी हैं. इनमें कैलाश पर्वत को उठाने का प्रसंग सबसे प्रसिद्ध है. कथा के अनुसार, रावण अपनी शक्ति के घमंड में कैलाश पर्वत को उठाने का प्रयास करने लगा. भगवान शिव ने रावण के इस अहंकार को समाप्त करने के लिए अपने पैर के अंगूठे से पर्वत को दबा दिया. इससे रावण का हाथ पर्वत के नीचे दब गया. रावण लंबे समय तक भगवान शिव का जाप करता रहा. उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उसे मुक्त किया और उसे शक्तिशाली वरदान भी दिए.
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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और रामायण कथा की जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.

वरुण चौहान
इलेक्ट्रानिक और डिजिटल मीडिया में करीब एक दशक से ज्यादा का अनुभव. 2008 में एशियन एकेडमी ऑफ फिल्म एंड टेलीविजन (AAFT) नोएडा से पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद कुछ अलग और नया करने की सोच के साथ मीडिया में अपने सफर की शुरुआत की. शुरुआत से ही मेरी रुचि उन विषयों को आम लोगों तक पहुंचाने में रही है, जो भारतीय संस्कृति, धार्मिक परंपराओं से जुड़े हैं. अपने करियर के दौरान Channel One News, Sahara Samay, A2Z News, News Express, National Voice और पंजाब केसरी डिजिटल जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला. इन संस्थानों में काम करते हुए समाचार लेखन, फील्ड रिपोर्टिंग,और डिजिटल कंटेंट को सीखने का अनुभव मिला. फिलहाल देश के सबसे बड़े न्यूज नेटवर्क TV9 भारतवर्ष में धर्म और आस्था से जुड़ी खबरों, धार्मिक आयोजनों, ज्योतिष, वास्तु, पौराणिक कथाओं, मंदिरों की परंपराओं और व्रत-त्योहारों से जुड़े विषयों को सरल, सहज और तथ्यपूर्ण भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी निभा रहा हूं. महाकुंभ 2025 की कवरेज मेरे करियर के महत्वपूर्ण अनुभवों में शामिल है, जहां करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था, अखाड़ों की परंपराओं, संत समाज की गतिविधियों और कुंभ से जुड़े धार्मिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर विस्तार से लिखने का अवसर मिला. इसके अलावा चारधाम यात्रा, सावन, नवरात्रि, दीपावली, होली, छठ पूजा, अमरनाथ यात्रा, रमज़ान और अन्य प्रमुख धार्मिक आयोजनों पर भी लगातार लेखन किया है. भारतीय संस्कृति, धर्म-दर्शन, ज्योतिष, अंक ज्योतिष, वास्तु शास्त्र, पुराणों और लोक आस्थाओं के अध्ययन में विशेष रुचि रखता हूं. मेरा प्रयास हमेशा यही रहता है कि धार्मिक और आध्यात्मिक विषयों को सरल भाषा के माध्यम से पाठकों तक पहुंचाया जाए, ताकि वे अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को बेहतर ढंग से समझ सकें.
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