Ranji Trophy: मां के लेट आने की वजह से बना क्रिकेटर, अब 9 विकेट लेकर जिताया मैच, तनय त्यागराजन की गजब कहानी

Published on 13 अक्टू॰ 2026

Ranji Trophy: मां के लेट आने की वजह से बना क्रिकेटर, अब 9 विकेट लेकर जिताया मैच, तनय त्यागराजन की गजब कहानी

तनय त्यागराजन ने हैदराबाद को जिताया (फोटो-इंस्टाग्राम)

रणजी ट्रॉफी 2026-27 सीजन की पहली जीत हैदराबाद को मिली. हैदराबाद ने त्रिपुरा को पारी और 40 रनों से हरा दिया. हैदराबाद इस सीजन जीत हासिल करने वाली पहली टीम बनी. त्रिपुरा ने पहली पारी में महज 134 रन बनाए और इसके बाद हैदराबाद ने पहली पारी में 294 रन बनाए. दूसरी पारी में त्रिपुरा की टीम सिर्फ 120 रनों पर ढेर हो गई जिसकी वजह से हैदराबाद को पारी की जीत हासिल हुई और उसे 7 अंक हासिल हुए. बता दें हैदराबाद की पहली जीत के हीरो तनय त्यागराजन रहे, जिन्होंने मैच में 9 विकेट चटकाए. आइए आपको बताते हैं कौन हैं तनय त्यागराजन?

मां के लेट होने की वजह से बने क्रिकेटर

तनय त्यागराजन हैदराबाद के लेफ्ट आर्म स्पिनर हैं. 30 साल का ये खिलाड़ी 37 फर्स्ट क्लास मैचों में 170 विकेट ले चुका है. जिसमें वो 12 बार फाइव विकेट हॉल और 2 बार 10 विकेट हॉल ले चुके हैं. तनय संयोग से क्रिकेटर बने थे. जब वो 8 साल के थे तो कोलकाता में पढ़ते थे. एक दिन उनकी मां उन्हें लेने लेट पहुंची. इस दौरान स्कूल में तनय को कोच ने गेंदबाजी के लिए कहा. तनय ने कमाल गेंदबाजी की और कोच उनकी गेंदबाजी देख काफी प्रभावित हुआ. बस फिर क्या था तनय के क्रिकेट का सफर शुरू हो गया.

तनय का करियर

2007 में उनके पिता का ट्रांसफर कोलकाता से हैदराबाद हुआ और तनय ने वहां ही क्रिकेट सीखा. हैदराबाद में मेंटॉर अभिजीत चटर्जी और कोच अदनान बाफना ने उनकी गेंदबाजी पर काम किया. इस खिलाड़ी ने साल 2017 में लिस्ट ए डेब्यू किया. 2018-19 में उनका रणजी डेब्यू हुआ और वो पहले ही सीजन में 5 मैचों में 17 विकेट ले गए. 2023-24 में इस खिलाड़ी ने 7 मैचों में 56 विकेट हासिल किए जिसमें 7 बार उन्होंने फाइव विकेट हॉल झटके. आईपीएल 2024 में उन्हें पंजाब किंग्स ने 20 लाख रुपये में खरीदा लेकिन उन्हें डेब्यू का मौका नहीं दिया गया. अब तनय ने एक बार फिर रणजी ट्रॉफी में दमदार प्रदर्शन कर टीम को जीत दिलाई है.

अनूप देव सिंह

अनूप देव सिंह

उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले का रहने वाला हूं. बचपन से ही खेलों से बेहद प्यार है. खासतौर पर क्रिकेट से जो इस देश का धर्म भी कहा जाता है. स्कूली पढ़ाई केंद्रीय विद्यालय से हुई. साल  2006 में दिल्ली यूनिवर्सिटी से हिंदी जर्नलिज्म की डिग्री हासिल की और उसके बाद मीडिया के मैदान में उतर गए और खेल की खबरों को ही अपना कर्म भी बना लिया. करियर की पहली नौकरी नेटवर्क 18 ग्रुप में मिली. शुरुआत IBN7 न्यूज चैनल से हुई जहां मैंने पांच सालों की लंबी पारी खेली. इसके बाद इंडिया टीवी, न्यूज नेशन जैसे बड़े नेशनल चैनल्स के साथ काम किया. 2016 में डिजिटल मीडिया में कदम रखा और ये मौका जी नेटवर्क ने दिया. एक साल तक क्रिकेट कंट्री के साथ काम किया और फिर हुई नेटवर्क 18 में वापसी. न्यूज 18 हिंदी की वेबसाइट में 4 सालों तक स्पोर्ट्स की हर खबर पाठकों तक पहुंचाई. अब टीवी9 के साथ हूं. क्रिकेट ही नहीं खेल की हर खबर आपतक एक नए अंदाज और नए कलेवर में पहुंचाता हूं.

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