RBI का फैसला और बाजार में गिरावट: दिवाली बोनस को SIP, FD या T-Bills में कहां लगाएं?

Published on 8 अक्टू॰ 2026

RBI का फैसला और बाजार में गिरावट: दिवाली बोनस को SIP, FD या T-Bills में कहां लगाएं?

Published: Thursday, October 8, 2026, 19:47 [IST]

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 7 अक्टूबर को रेपो रेट बढ़ाकर 5.50 फीसदी कर दिया। इसके बाद बाजार में घबराहट दिखी और 8 अक्टूबर को सेंसेक्स-निफ्टी एक बार फिर गिर गए। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और निवेशकों के संभलकर कदम उठाने से रुपया भी कमजोर पड़ा है। इस बीच, आरबीआई के फैसले और नकदी के नए संकेतों को देखते हुए बैंकों ने अपनी डिपॉजिट दरों में बदलाव शुरू कर दिया है। ऐसे में त्योहारों पर मिले दिवाली बोनस को लेकर बड़ा सवाल यह है कि पैसे कहां लगाएं—SIP, एकमुश्त निवेश (Lump sum), एफडी (FD) या ट्रेजरी बिल (T-Bills)?

कम समय के लिए पैसे पार्क करने पर अब बेहतर रिटर्न मिल रहा है, लेकिन टैक्स और एग्जिट कॉस्ट (निकालने का खर्च) का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। आरबीआई की हालिया टी-बिल (T-Bill) नीलामी में अलग-अलग अवधि के लिए 5.57 से 6.29 फीसदी के आसपास यील्ड मिली। वहीं ओवरनाइट वेरिएबल रेट रिवर्स रेपो (VRRR) का कट-ऑफ 5.24 फीसदी के करीब रहा। हाल के दिनों में लिक्विड फंड्स ने करीब 6.5 से 7.0 फीसदी का रिटर्न दिया है, और आर्बिट्राज फंड्स का हाल भी ऐसा ही रहा। चूंकि आर्बिट्राज फंड्स इक्विटी-ओरिएंटेड होते हैं, इसलिए इनके मुनाफे पर इक्विटी वाला टैक्स लगता है। इस उतार-चढ़ाव भरे हफ्ते में सिर्फ आकर्षक रिटर्न देखकर फैसला न लें, बल्कि टैक्स के बाद मिलने वाले असल मुनाफे की तुलना जरूर करें।

RBI Repo Rate Hike 2026: Best Investment Options for Diwali Bonus Amid Market Volatility and FD Rates
विकल्पअनुमानित रिटर्न (वार्षिक)संभावित टैक्स (मौजूदा नियम)टैक्स के बाद रिटर्न (30% स्लैब)जरूरी बात
91–364 दिन के T-Bills5.6–6.3%टैक्स स्लैब के अनुसार (ब्याज)3.9–4.4%हर हफ्ते नीलामी
लिक्विड फंड्स6.5–7.0%टैक्स स्लैब के अनुसार (कैपिटल गेन्स)4.6–4.9%T+1 लिक्विडिटी
आर्बिट्राज फंड्स (6.5–7.0%इक्विटी STCG 20%5.2–5.6%15–30 दिन में एग्जिट लोड
बैंक एफडी (बड़े बैंक)6.8–7.2%टैक्स स्लैब के अनुसार (ब्याज)4.8–5.0%समय से पहले निकालने पर पेनाल्टी
सीनियर सिटीजन SFB एफडी8.3–8.5%टैक्स स्लैब के अनुसार (ब्याज)5.8–6.0%₹5 लाख तक DICGC कवर

RBI के फैसले और बाजार की गिरावट के बाद: SIP, एकमुश्त निवेश या STP—क्या चुनें?

अगर आपको 3 से 6 महीने में पैसों की जरूरत है, तो टी-बिल या लिक्विड फंड्स को तरजीह दें और इक्विटी के जोखिम से दूर रहें। वहीं, अगर आप 3 से 5 साल के नजरिए से निवेश कर रहे हैं, तो अपनी SIP जारी रखें; बाजार का उतार-चढ़ाव कॉस्ट एवरेजिंग के जरिए आपका ही फायदा कराएगा। अगर बोनस की बड़ी रकम को सही समय पर लगाने की सोच रहे हैं, तो उसे पहले लिक्विड या आर्बिट्राज फंड में रखें और फिर 3 से 6 महीने का सिस्टमैटिक ट्रांसफर प्लान (STP) शुरू करें। याद रखें, किसी एक दिन बाजार में आई गिरावट से आगे की चाल का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता।

FD/T-Bill दरें, सीनियर सिटीजन्स और नया टैक्स नियम

बुधवार को आए आरबीआई के फैसले के बाद बैंकों और फाइनेंस कंपनियों ने अपनी ब्याज दरों की लिस्ट बदलना शुरू कर दिया है। बजाज फाइनेंस ने सबसे पहले कदम उठाते हुए एफडी दरों में 40 बेसिस पॉइंट तक की बढ़ोतरी की है। चुनिंदा स्मॉल फाइनेंस बैंकों में सीनियर सिटीजन्स के लिए दरें अब भी 8.50 फीसदी तक पहुंच रही हैं। वहीं बड़े बैंकों में लोकप्रिय अवधियों पर ब्याज दरें 7 फीसदी के आसपास बनी हुई हैं। ध्यान रखें कि डिपॉजिट इंश्योरेंस प्रति बैंक ₹5 लाख तक ही सीमित है। नए टैक्स सिस्टम के तहत, इक्विटी फंड्स पर शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन्स (STCG) पर 20 फीसदी टैक्स लगता है, जबकि तय सीमा से ज्यादा के लॉन्ग-टर्म गेन्स (LTCG) पर 12.5 फीसदी टैक्स देना होता है।

3, 5 और 10 साल के लिए रिस्क-बेस्ड प्लान और जरूरी चेकलिस्ट

सुरक्षित निवेश (3 साल के लिए): 91, 182 और 364 दिन वाले टी-बिल या छोटी अवधि की एफडी में बारी-बारी से (लैडरिंग करके) पैसे लगाएं। संतुलित निवेश (5 साल के लिए): अपने कोर इक्विटी एसआईपी जारी रखें और एकमुश्त रकम को 6 महीने के एसटीपी के जरिए धीरे-धीरे लगाएं। एग्रेसिव निवेश (10 साल के लिए): लार्ज और मिडकैप एसआईपी पर ध्यान दें; एक बार में ही पूरा पैसा लगाने से बचें। इस हफ्ते के लिए चेकलिस्ट: अपना इमरजेंसी फंड मजबूत करें और महंगे कर्ज सबसे पहले चुकाएं। इसके अलावा, अपना टैक्स स्लैब चेक करें, बैंकों की एफडी दरों की तुलना करें और एसटीपी की तारीखें तय करें।

Story first published: Thursday, October 8, 2026, 19:47 [IST]

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