Rewa Kalpana Mishra Case: गर्भवती-नवजात की मौत केस में डॉ. सोनल अग्रवाल की सेवा समाप्त, भूख हड़ताल पर बैठे पिता को पुलिस ने उठाया - Haribhoomi

Published on 17 सित॰ 2026

रीवा के कल्पना मिश्रा मौत मामले में डॉ. सोनल अग्रवाल की सेवा समाप्त कर दी गई। वहीं FIR की मांग को लेकर अनशन कर रहे पिता रामशरण मिश्रा को पुलिस ने धरने से हटाया।

Rewa Kalpana Mishra Case

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  • Published: 17 Sep 2026, 08:48 AM IST
  • Last Updated: 17 Sep 2026, 08:48 AM IST

रीवा। संजय गांधी अस्पताल में प्रसूता कल्पना मिश्रा और उसके नवजात बच्चे की मौत के मामले में 21 दिन बाद एक और बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया गया है। श्याम शाह चिकित्सा महाविद्यालय ने स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की डॉक्टर डॉ. सोनल अग्रवाल की सरकारी सेवा समाप्त करने का आदेश जारी किया है। यह आदेश 16 सितंबर 2026 से प्रभावी किया गया है।

इसी बीच कल्पना मिश्रा और उसके नवजात बच्चे को न्याय दिलाने की मांग को लेकर करीब 15 दिन से भूख हड़ताल कर रहे पिता रामशरण मिश्रा को बुधवार को पुलिस और प्रशासन की टीम ने धरना स्थल से हटा दिया। उनकी तबीयत लगातार अनशन के कारण बिगड़ रही थी। बाद में उन्हें अस्पताल ले जाया गया।

FIR और निष्पक्ष जांच की मांग पर अड़ा परिवार
कल्पना मिश्रा के परिजन लगातार मांग कर रहे हैं कि उसकी और नवजात बच्चे की मौत के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की जाए और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो। इसी मांग को लेकर रामशरण मिश्रा सिरमौर चौराहे पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे थे।

पुलिस की कार्रवाई के बाद परिजनों और कांग्रेस नेताओं ने विरोध जताया। परिवार का कहना है कि केवल एक डॉक्टर के खिलाफ विभागीय कार्रवाई से मामला खत्म नहीं होता। परिजनों की मांग है कि घटना की जिम्मेदारी तय कर दोषियों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाए।

25 अगस्त को अस्पताल में भर्ती हुई थीं कल्पना
कल्पना मिश्रा को प्रसव के लिए 25 अगस्त 2026 को संजय गांधी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 26 अगस्त की रात प्रसव के दौरान कल्पना और उसके नवजात बच्चे की मौत हो गई थी। घटना के बाद परिजनों ने इलाज में लापरवाही के आरोप लगाए थे। मामले की जांच के लिए अधिकारियों की टीम भी गठित की गई थी।

घटना के बाद अस्पताल से जुड़ा एक वीडियो भी सामने आया था, जिसमें कल्पना को परिजनों से मदद की गुहार लगाते देखा गया। वीडियो सामने आने के बाद मामला काफी चर्चा में आया। हालांकि, वीडियो अपने आप में मौत के कारण या किसी व्यक्ति की आपराधिक जिम्मेदारी तय नहीं करता।

डॉ. सोनल अग्रवाल की सेवा किस मामले में खत्म हुई?
डॉ. सोनल अग्रवाल की सेवा समाप्त करने के आदेश में 2023 से लंबित विभागीय मामले का भी उल्लेख है। उपलब्ध आदेश की रिपोर्टों के मुताबिक, मेडिकल कॉलेज से संबद्ध अस्पतालों से मरीजों को निजी नर्सिंग होम भेजने की शिकायतों की जांच के लिए चिकित्सा शिक्षा विभाग ने चार सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति बनाई थी।

समिति की रिपोर्ट में डॉ. सोनल अग्रवाल के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा की गई थी। इसके बाद उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया और उन्होंने अपना स्पष्टीकरण भी दिया था। बाद में सेवा से पृथक करने का प्रस्ताव कार्यकारिणी समिति के समक्ष रखा गया।

16 सितंबर 2026 की कार्यकारिणी समिति के निर्णय के आधार पर अब उनकी सेवाएं समाप्त करने का आदेश जारी किया गया है। रिपोर्टों के मुताबिक, आदेश में भविष्य में शासकीय सेवा के लिए उनकी पात्रता पर भी असर का उल्लेख है।

महत्वपूर्ण बात यह है कि सेवा समाप्ति की यह विभागीय कार्रवाई 2023 के पुराने मामले से जुड़ी है। इसे कल्पना मिश्रा और उसके नवजात की मौत के मामले में डॉ. सोनल अग्रवाल की आपराधिक दोषसिद्धि के रूप में नहीं लिखा जा सकता। कल्पना मामले में उनकी भूमिका की जांच अलग प्रक्रिया का हिस्सा है।

कल्पना मामले में अब तक क्या हुआ?
कल्पना और उसके नवजात की मौत के बाद अस्पताल के दो नर्सिंग स्टाफ को निलंबित किया गया था। इसके बाद ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर डॉ. सोनल अग्रवाल और डॉ. निधि पांडे को भी निलंबित किया गया था। इस तरह शुरुआती कार्रवाई में कुल चार स्वास्थ्यकर्मी निलंबित किए गए।

इसके अलावा संजय गांधी अस्पताल के अधीक्षक डॉ. राहुल मिश्रा को पद से हटा दिया गया था। बाद में मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. सुनील अग्रवाल का भी तबादला सतना मेडिकल कॉलेज किया गया। मामले की जांच के लिए भोपाल से विशेष टीम के रीवा पहुंचने और डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ तथा परिजनों के बयान दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई थी।

पिता को धरना स्थल से हटाने पर कांग्रेस ने उठाए सवाल
रामशरण मिश्रा को सिरमौर चौराहे से हटाए जाने पर कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता डॉ. विनोद शर्मा ने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि बेटी और नवजात को न्याय दिलाने के लिए पिता कई दिनों से अनशन कर रहे थे और उनकी मांग सुनने के बजाय उन्हें धरना स्थल से हटा दिया गया।

वहीं, प्रशासन की ओर से तहसीलदार शिवशंकर शुक्ला ने बताया कि सिरमौर चौराहा शहर का व्यस्त इलाका है। लंबे समय तक धरना चलने से यातायात और दूसरी व्यवस्थाएं प्रभावित हो रही थीं, इसलिए प्रशासन ने कार्रवाई की।

फिलहाल परिवार की मुख्य मांग FIR दर्ज करने और मामले की निष्पक्ष जांच की है। वहीं, प्रशासनिक और विभागीय स्तर पर अलग-अलग कार्रवाई का सिलसिला जारी है।