एक दौर में छोटे-मोटे अपराधों से शुरुआत करने वाला लाहौर का शहजाद भट्टी आज भारतीय जांच एजेंसियों के लिए 'हाइब्रिड टेररिज्म' का एक खतरनाक नेटवर्क बन चुका है. पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के इशारे पर भारत में हथियार, ड्रग्स और हथगोले की तस्करी करने वाले शहजाद भट्टी नेटवर्क पर बुधवार को केंद्र सरकार ने बड़ा प्रहार करते हुए इसे UAPA के तहत आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया.
इससे पहले अगस्त में 14 राज्यों में कार्रवाई के दौरान भट्टी के गैंग से जुड़े 200 से ज्यादा लोगों की गिरफ्तारी और 80 से अधिक FIR दर्ज किए जाने की जानकारी सरकार ने दी थी. शाहजाद भट्टी मूल रूप से पाकिस्तान का गैंगस्टर है और भारतीय एजेंसियों के मुताबिक वह विदेश से अपने नेटवर्क को संचालित करता रहा है.
मई 2026 की एक रिपोर्ट में भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के हवाले से बताया गया था कि भट्टी सोशल मीडिया के जरिए भारत में युवाओं तक पहुंच बनाने और उन्हें पैसे का लालच देकर आपराधिक या आतंकी गतिविधियों में इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहा था. एजेंसियों के मुताबिक, भर्ती किए गए युवाओं से रेकी, हथियारों की डिलीवरी और लक्षित हमलों जैसे काम कराए जाते थे.
सरकार ने अगस्त में शहजाद भट्टी नेटवर्क को पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से समर्थित नेटवर्क बताया था. सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई में IED, पाकिस्तान ऑर्डनेंस फैक्ट्री की मार्किंग वाले ग्रेनेड, पिस्तौल, जिंदा कारतूस और निगरानी के लिए इस्तेमाल होने वाले CCTV कैमरे बरामद किए गए थे. हालांकि, ये सरकारी एजेंसियों के आरोप और जांच के निष्कर्ष हैं; भट्टी के खिलाफ जुड़े सभी मामलों का न्यायिक निष्कर्ष अभी बाकी है.
मूसेवाला से लॉरेंस बिश्नोई तक कनेक्शन
भट्टी का नाम पंजाबी सिंगर सिद्धू मूसेवाला की 2022 में हुई हत्या से जुड़े मामलों और लॉरेंस बिश्नोई गैंग से उसके कथित रिश्तों को लेकर भी सामने आया है. भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने उसके नेटवर्क और बिश्नोई गैंग के बीच संपर्क की जांच की है. 2024 में सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया था, जिसमें लॉरेंस बिश्नोई और भट्टी को साथ दिखाया गया था. बाद में दोनों के रिश्तों में कथित तौर पर तनाव की बात सामने आई.
भट्टी ने खुद सोशल मीडिया पर ऐसे दावे किए थे जिनमें उसने बिश्नोई गैंग और मूसेवाला हत्याकांड को लेकर कई बातें कही थीं. हालांकि, उसके इन दावों को स्वतंत्र रूप से तथ्य के रूप में नहीं देखा जा सकता.
बाबा सिद्दीकी हत्याकांड और भागने में मदद का आरोप
भट्टी का नाम 2024 में एनसीपी नेता बाबा सिद्दीकी की हत्या की जांच के दौरान भी सामने आया. भारतीय एजेंसियों से जुड़ी रिपोर्टों में आरोप लगाया गया कि उसने मामले के एक आरोपी जीशान अख्तर को भारत से बाहर निकलने और अजरबैजान पहुंचने में मदद की थी. यही वह बिंदु है जहां भट्टी की कहानी पारंपरिक गैंगवार से आगे जाती दिखाई देती है. जांच एजेंसियों के मुताबिक, उसके नेटवर्क में हथियारों और नशीले पदार्थों की तस्करी, सोशल मीडिया भर्ती और सीमा पार से मिलने वाले निर्देश एक-दूसरे से जुड़े हुए थे.
ग्रेनेड अटैक से पुलिस थाने के धमाके तक
भट्टी के खिलाफ जांच में कई धमाकों के मामलों का भी जिक्र है. NIA के मुताबिक, मार्च 2025 में जालंधर में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर रोजर सैंडू के घर पर हुए ग्रेनेड हमले की साजिश को भट्टी से जोड़ा गया. एजेंसी ने अप्रैल 2026 में इस मामले में भट्टी को फरार आरोपी के तौर पर चार्जशीट किया था.
NIA ने नवंबर 2025 में हरियाणा के सिरसा महिला थाने में हुए धमाके और जनवरी 2026 में अंबाला के बलदेव नगर थाने में हुए कार बम धमाके की जांच में भी भट्टी को कथित मास्टरमाइंड बताया. जून 2026 में NIA ने पंजाब और हरियाणा में 18 जगहों पर छापेमारी कर इन मामलों से जुड़े लोगों और नेटवर्क की जांच की थी.
अंबाला मामले में एनआईए की चार्जशीट के मुताबिक, थाने में इस्तेमाल आईईडी को पाकिस्तान में बने नोकिया फोन से ट्रिगर किया गया था. इस मामले में भट्टी समेत आठ लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई है.
सोशल मीडिया बना नेटवर्क का नया हथियार?
भट्टी से जुड़े मामलों में एक पैटर्न सोशल मीडिया का भी सामने आया है. जांच एजेंसियों के मुताबिक, सोशल मीडिया के जरिए युवाओं की पहचान की जाती थी और फिर उन्हें पैसे या दूसरे लालच देकर नेटवर्क में शामिल किया जाता था. इसके बाद उनसे रेकी, हथियार पहुंचाने या हमले से जुड़े काम कराने के आरोप हैं.
यही मॉडल सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का विषय है क्योंकि इसमें विदेश में बैठे कथित हैंडलर और भारत में मौजूद छोटे-छोटे मॉड्यूल अलग-अलग स्तर पर काम कर सकते हैं. अगस्त में सरकार ने बताया था कि भट्टी गैग के खिलाफ 14 राज्यों में कार्रवाई के दौरान 253 लोगों को हिरासत में लिया गया और 200 से ज्यादा गिरफ्तारियां दर्ज की गईं.
---- समाप्त ----