Simdega: खनिज संशोधन विधेयक को लेकर विधायक नमन विक्सल कोंगाड़ी ने केंद्र पर साधा निशाना

Published on 16 अग॰ 2026

Simdega: कोलेबिरा विधायक नमन विक्सल कोंगाड़ी ने रविवार को प्रेस वार्ता कर केंद्र सरकार की नीतियों पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि केंद्र की नीतियां देश की संघीय शासन व्यवस्था, संविधान, आदिवासी हितों, पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए गंभीर खतरा हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार सत्ता के केंद्रीकरण और कुछ पूंजीपति मित्रों को लाभ पहुंचाने की दिशा में काम कर रही है.

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विधायक ने खान और खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 में संशोधन तथा मानसून सत्र 2026 में खान और खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 को पारित किए जाने का विरोध किया. उन्होंने कहा कि राज्यों को अपने प्राकृतिक संसाधनों से प्राप्त होने वाली आय और सेस के माध्यम से स्थानीय विकास, विस्थापन, प्रदूषण तथा खनन से प्रभावित समुदायों के हितों की भरपाई करने का अधिकार मिलना चाहिए.


विधायक कोंगाड़ी ने कहा कि झारखंड जैसे अनुसूचित क्षेत्रों में पेसा अधिनियम, 1996 और राज्य की नियमावली के तहत ग्रामसभा एवं स्थानीय समुदायों को विशेष अधिकार प्राप्त हैं. खनन से जुड़े फैसलों में इन अधिकारों की अनदेखी आदिवासी समुदायों के हितों के विरुद्ध है. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के समता बनाम आंध्र प्रदेश राज्य मामले के फैसले का उल्लेख करते हुए अनुसूचित क्षेत्रों में निजी खनन गतिविधियों को लेकर भी सवाल उठाए. 


उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों से जुड़े फैसलों का असर स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल, रोजगार, आर्थिक सशक्तिकरण और जनकल्याणकारी योजनाओं पर पड़ेगा. साथ ही, भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास एवं उचित मुआवजे से जुड़े कानूनों में किए गए बदलावों का भी उन्होंने विरोध किया.


विधायक ने वन (संरक्षण) कानून में 2023 के संशोधन का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे वनभूमि, पहाड़ और नदी-नालों पर खनन एवं औद्योगिक गतिविधियों का दबाव बढ़ सकता है. उन्होंने वन अधिकार अधिनियम, 2006 के तहत आदिवासी एवं परंपरागत वनवासियों के अधिकारों और पर्यावरणीय संरक्षण को प्राथमिकता देने की मांग की. 


उन्होंने केंद्र सरकार से प्राकृतिक संसाधनों पर राज्यों और स्थानीय समुदायों के अधिकार सुरक्षित रखने तथा आदिवासी हितों और संविधान की मूल भावना के अनुरूप नीतियां बनाने की मांग की. उन्होंने कहा कि 18 अगस्त को वे कोलेबिरा में धरना पर बैठेंगे.

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