Simdega: प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध झारखंड का सिमडेगा जिला आज नवाचार आधारित आजीविका मॉडल के माध्यम से ग्रामीण एवं जनजातीय समुदायों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला रहा है. मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के नेतृत्व में राज्य सरकार की "स्थानीय संसाधन, स्थानीय रोजगार और जनजातीय आजीविका सशक्तिकरण" की परिकल्पना को धरातल पर सफलतापूर्वक उतारा गया है.
सिमडेगा जिला प्रशासन विभिन्न विभागों के समन्वित प्रयास एवं जनभागीदारी के माध्यम से कई अभिनव पहल संचालित कर रही हैं. इन्हीं प्रयासों के तहत मत्स्य विभाग द्वारा केलाघाघ जलाशय में शुरू किया गया जायंट फ्रेशवॉटर प्रॉन (Giant Freshwater Prawn) पालन आज जनजातीय परिवारों के लिए आय, पोषण और आत्मनिर्भरता का सशक्त माध्यम बन चुका है.
इसे भी पढ़ें:


जिला प्रशासन की प्राथमिकता केवल योजनाओं का क्रियान्वयन नहीं, बल्कि स्थानीय संसाधनों का वैज्ञानिक एवं सतत उपयोग सुनिश्चित कर ग्रामीण परिवारों की आय में वृद्धि करना, रोजगार के नए अवसर सृजित करना तथा समावेशी विकास को गति देना है. इसी सोच के अनुरूप वर्ष 2022-23 से 2024-25 तक के लिए केलाघाघ जलाशय में पायलट परियोजना के रूप में जायंट फ्रेशवॉटर प्रॉन पालन की शुरुआत की गई, जिसका मुख्य उद्देश्य जनजातीय समुदायों की आजीविका को सुदृढ़ बनाना और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त करना है.
इस परियोजना के अंतर्गत गठित मत्स्यजीवी सहयोग समिति के लगभग 300 सदस्य वर्तमान में सामूहिक रूप से जायंट फ्रेशवॉटर प्रॉन का पालन कर रहे हैं. वैज्ञानिक पद्धति, नियमित प्रशिक्षण तथा विभागीय तकनीकी मार्गदर्शन के कारण यह पहल आज एक सफल और टिकाऊ आजीविका मॉडल के रूप में स्थापित हो चुकी है.
वर्तमान में समिति के लगभग 20 से 30 सक्रिय सदस्य प्रतिदिन 1.5 से 2 किलोग्राम जायंट फ्रेशवॉटर प्रॉन का उत्पादन और मार्केटिंग कर रहे हैं. बाजार में इसकी कीमत 600 से 1000 रुपए प्रति किलोग्राम तक प्राप्त हो रही है, जिससे प्रत्येक सक्रिय सदस्य को 2 से 3 लाख रुपए प्रति वर्ष तक की अतिरिक्त आय अर्जित हो रही है. इस अतिरिक्त आय से परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है, बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं एवं पोषण पर निवेश बढ़ा है तथा ग्रामीण परिवारों के जीवन स्तर में उल्लेखनीय सुधार आया है.
इस सफलता के पीछे मत्स्य विभाग, सिमडेगा की निरंतर तकनीकी सहायता, नियमित मॉनिटरिंग एवं क्षमता विकास कार्यक्रमों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है. विभाग द्वारा समय-समय पर प्रशिक्षण, वैज्ञानिक प्रबंधन, जलाशय रख-रखाव तथा उत्पादन बढ़ाने के लिए आवश्यक तकनीकी सुझाव उपलब्ध कराए जाते रहे हैं. जिला मत्स्य पदाधिकारी के मार्गदर्शन में समिति के सदस्यों ने आधुनिक मत्स्य पालन तकनीकों को अपनाकर सफलता प्राप्त की है.
इस मॉडल की लोकप्रियता अब सिमडेगा की सीमाओं से बाहर भी पहुंच चुकी है. सोशल मीडिया एवं फेसबुक पर साझा किए गए वीडियो के माध्यम से इस पहल की व्यापक पहचान बनी है. परिणामस्वरूप रांची, धनबाद तथा पड़ोसी राज्य ओडिशा के सुंदरगढ़, बिरमित्रपुर सहित अन्य क्षेत्रों से भी खरीदार सीधे केलाघाघ पहुंचकर जायंट फ्रेशवॉटर प्रॉन की खरीदारी कर रहे हैं. इससे स्थानीय उत्पाद को बेहतर बाजार मिला है और ग्रामीणों की आय में लगातार वृद्धि हो रही है.
Lagatar Media की यह खबर आपको कैसी लगी. नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी राय साझा करें