कम सोने से ही नहीं, ज्यादा सोने की आदत भी बन सकती है बीमारियों की वजह, जानें इसके साइड इफेक्ट्स - Haribhoomi

Published on 1 अग॰ 2026

Sleep Health Alert: कम सोने से ही नहीं, ज्यादा सोने की आदत भी बन सकती है बीमारियों की वजह, जानें इसके साइड इफेक्ट्स

Sleep Health Alert: कम सोना सेहत के लिए हानिकारक होता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि ज्यादा सोने की आदत भी शरीर को नुकसान पहुंचाती है।

Side effects of sleeping too much

ज्यादा सोने से होने वाली स्वास्थ्य समस्याएं।

  • Published: 01 Aug 2026, 05:04 PM IST
  • Last Updated: 01 Aug 2026, 05:04 PM IST

Sleep Health Alert: अच्छी नींद स्वस्थ शरीर और तेज दिमाग की सबसे बड़ी जरूरत मानी जाती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि सिर्फ कम नींद ही नहीं, बल्कि जरूरत से ज्यादा सोना भी आपकी सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है? कई लोग छुट्टी के दिन 10 से 12 घंटे तक सोना आराम का तरीका मानते हैं, जबकि विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक जरूरत से ज्यादा सोने की आदत कई स्वास्थ्य समस्याओं का संकेत भी हो सकती है।

आमतौर पर एक स्वस्थ वयस्क के लिए 7 से 9 घंटे की नींद पर्याप्त मानी जाती है। यदि कोई व्यक्ति नियमित रूप से 9-10 घंटे या उससे अधिक सोता है और फिर भी थकान महसूस करता है, तो यह किसी छिपी हुई बीमारी, खराब लाइफस्टाइल या स्लीप डिसऑर्डर का संकेत हो सकता है। 

ज्यादा सोने से होने वाले साइड इफेक्ट्स

बढ़ सकता है मोटापा और वजन
जरूरत से ज्यादा सोने वाले लोगों की शारीरिक गतिविधियां कम हो जाती हैं। लंबे समय तक बिस्तर पर रहने से कैलोरी बर्न कम होती है, जिससे वजन बढ़ने का खतरा रहता है। इसके अलावा, अनियमित नींद का पैटर्न शरीर के मेटाबॉलिज्म को भी प्रभावित कर सकता है, जिससे मोटापे की संभावना बढ़ जाती है।

दिल की सेहत पर पड़ सकता है असर
कुछ शोध बताते हैं कि लंबे समय तक जरूरत से ज्यादा सोने की आदत हृदय संबंधी समस्याओं के बढ़ते जोखिम से जुड़ी हो सकती है। हालांकि इसका सीधा कारण हमेशा स्पष्ट नहीं होता, लेकिन अधिक नींद कई बार ऐसी स्वास्थ्य स्थितियों का संकेत होती है जो हार्ट हेल्थ को प्रभावित करती हैं। इसलिए लगातार अधिक नींद आने पर डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

डायबिटीज का खतरा बढ़ सकता है
बहुत ज्यादा सोना शरीर में ग्लूकोज मेटाबॉलिज्म और इंसुलिन की कार्यप्रणाली को प्रभावित कर सकता है। यदि इसके साथ शारीरिक गतिविधि भी कम हो, तो टाइप-2 डायबिटीज का खतरा बढ़ सकता है। स्वस्थ खानपान और नियमित व्यायाम के साथ संतुलित नींद बनाए रखना जरूरी है।

मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ सकता है प्रभाव
जरूरत से ज्यादा सोने वाले कई लोगों में सुस्ती, ऊर्जा की कमी, ध्यान लगाने में परेशानी और मूड खराब रहने जैसी समस्याएं देखी जाती हैं। कुछ मामलों में यह डिप्रेशन, एंग्जायटी या अन्य मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से भी जुड़ा हो सकता है। यदि लंबे समय तक ऐसा महसूस हो, तो विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए।

सिरदर्द और पीठ दर्द की समस्या
लंबे समय तक एक ही स्थिति में सोने से मांसपेशियों और रीढ़ पर दबाव बढ़ सकता है। इसके कारण पीठ दर्द, गर्दन में अकड़न और सिरदर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं। खासकर सप्ताहांत में सामान्य से कई घंटे ज्यादा सोने की आदत कुछ लोगों में सिरदर्द का कारण बन सकती है।

कैसे रखें नींद का सही संतुलन?

  • रोजाना 7 से 9 घंटे की नियमित नींद लें।
  • हर दिन एक ही समय पर सोने और जागने की आदत बनाएं।
  • सोने से पहले मोबाइल और लैपटॉप का इस्तेमाल कम करें।
  • नियमित व्यायाम करें और कैफीन का सेवन रात में सीमित रखें।
  • अगर 9-10 घंटे सोने के बाद भी थकान बनी रहती है, तो डॉक्टर से जांच कराएं।

(Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई सामग्री सिर्फ जानकारी के लिए है। हरिभूमि इनकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी सलाह या सुझाव को अमल में लेने से पहले किसी विशेषज्ञ/डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।)

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लेखक: (कीर्ति)

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