Uncovered With Manoj Gairola: बांकीपुर में प्रशांत किशोर ने कैसे ढहा दिया BJP का मजबूत किला?

Published on 4 अग॰ 2026

Uncovered With Manoj Gairola: बीजेपी का गढ़ मानी जाने वाली बिहार की बांकीपुर सीट पर हुए उपचुनाव में जन सुराज पार्टी ने जीत हासिल की. चलिए जानते हैं प्रशांत किशोर ने बीजपी के इस मजबूत किले को कैसै ढहा दिया?

Uncovered With Manoj Gairola: बीजेपी का गढ़ मानी जाने वाली बिहार की बांकीपुर सीट पर हुए उपचुनाव में जन सुराज पार्टी ने जीत हासिल की. चलिए जानते हैं प्रशांत किशोर ने बीजपी के इस मजबूत किले को कैसै ढहा दिया?

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Uncovered With Manoj Gairola on Bankipur PK Victory

Uncovered With Manoj Gairola:बिहार के बांकीपुर में बीजेपी हार गई. ये वो सीट थी जो बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने खाली की थी. इससे ज्यादा बड़ी प्रतिष्ठा की लड़ाई बीजेपी के लिए नहीं हो सकती थी. प्रशांत किशोर ने इतनी अहम सीट पर बीजेपी को बुरी तरह मात दे दी. लेकिन बांकीपुर का फैसला बस प्रशांत किशोर तक सीमित नहीं है. ये  जंतर-मंतर पर जेन जी के प्रोटेस्ट के बाद ये देश में पहला चुनाव था. प्रशांत किशोर तो शुरू से ही शिक्षा और रोजगार जैसे मुद्दे उठाते रहे हैं. 

1995 से बांकीपुर में कभी नहीं हारी बीजेपी

बांकीपुर सीट पर बीजेपी 1995 के बाद से कभी नहीं हारी थी. ये सीट नितिन नबीन के बीजेपी अध्यक्ष बनने के बाद खाली हुई थी. बांकीपुर में राज्य सरकार के 14 मंत्री, बिहार से आने वाले केंद्र के सभी मंत्री और  भोजपुरी फिल्म स्टार्स तक ने जमकर प्रचार किया. खुद नितिन नबीन और सम्राट चौधरी ने यहां डेरा डाला हुआ था. ऐसे में ये सवाल खड़ा होता है कि बीजेपी की इतनी शर्मनाक हार क्यों हुई? और क्या जेन जी ने ही बीजेपी को उसके गढ़ में हरा दिया?

नमस्कार मैं हूं मनोज गैरोला... अनकवर्ड के आज के एपिसोड में हम बात करेंगे बांकीपुर BY-ELECTION में जेन जी प्रोटेस्ट की क्या भूमिका रही है. लेकिन सबसे पहले आपको प्रशांत किशोर की एक रणनीति के बारे में बताते हैं. जो इस चुनाव के तार सीधे जेन जी प्रोटेस्ट के साथ जोड़ती है. 

2025 के विधानसभा चुनाव में जन सुराज पार्टी को मिली थी हार

2025 बिहार विधानसभा चुनाव में प्रशांत किशोर की पार्टी जन सुराज ने 243 में से 238 सीटों पर चुनाव लड़ा था. उन्होंने जमकर प्रचार किया और खूब सुर्खियां भी बटोरीं. लेकिन वो खुद चुनावी मैदान में नहीं उतरे. नतीजों में उनकी पार्टी के खाते में एक भी सीट नहीं आई. अधिकांश जगह उनकी जमानत जब्त हो गई थी. जब बांकीपुर सीट खाली हुई, तब किसी ने नहीं सोचा था कि इस सीट से प्रशांत किशोर चुनावी ताल ठोकने उतर जाएंगे. Election Strategy के मास्टर कहे जाने वाले प्रशांत के इस फैसले को समझने के लिए आप इस टाइमलाइन को देखिए...

बीजेपी गढ़ में कैसे चुनाव जीते PK?

3 मई को नीट का पेपर लीक हुआ. जिसके खिलाफ पूरे देश में आक्रोश फैला. 16 मई को सोशल मीडिया पर कॉकरोच जनता पार्टी बनी. 6 जून को जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी ने धरना शुरू किया. 28 जून को सोनम वांगचुक ने अनशन शुरू कर दिया. और पूरे देश में इसकी चर्चा होने लगी.  5 जुलाई को जन सुराज ने ऐलान कर दिया कि प्रशांत किशोर चुनाव लड़ेंगे. जाहिर है प्रशांत किशोर युवाओं के मन में पनप रहे गुस्से को पहचान गए. और उन्होंने एक ऐसी सीट से चुनाव लड़ने का रिस्क लिया जो कि बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष की सीट थी. बीजेपी की इज्जत यहां दांव पर थी.

आप इस डेटा से समझ सकते हैं. प्रशांत किशोर ने बीजेपी को उसकी कितनी मजबूत सीट पर हराया है. बांकीपुर सीट 2008 में बनी थी. उससे पहले ये पटना वेस्ट सीट के नाम से जानी जाती थी. साल 1995 से लेकर 2005 तक नितिन नबीन के पिता नबीन सिन्हा यहां से जीतते रहे. उनकी मौत के बाद साल 2006 में यहां उपचुनाव हुआ. जिसमें नितिन नबीन को 82% वोट मिले. इसके बाद नितिन नबीन बांकीपुर से 4 बार और चुनाव जीते. हर बार उन्हें 60%  से ज्यादा वोट मिले.

उपचुनाव में दिखा जेन जी फैक्टर का असर

उनकी जीत के पीछे यहां का कास्ट कॉम्बिनेशन भी एक बड़ा फैक्टर है. यहां अपर कास्ट वोटर्स की संख्या लगभग 40% है, जिसमें 15% कायस्थ हैं. इसके अलावा 8% कुर्मी और कोइरी हैं. जो कि एनडीए के वोटर्स माने जाते हैं. इसीलिए ये सीट बीजेपी का मजबूत गढ़ रही. और इसी गढ़ में अब प्रशांत किशोर ने सेंध लगाई है. इसकी वजह ये है कि इस बार के चुनाव में कास्ट से ज्यादा जेन जी फैक्टर हावी रहा.

एजुकेशनल इंस्टीट्यूट्स का हब है बांकीपुर

बांकीपुर सीट के इलाके में पटना यूनिवर्सिटी, NIT पटना, AN कॉलेज, BN कॉलेज और साइंस कॉलेज जैसे बड़े एजुकेशनल इंस्टीट्यूट्स हैं और कोचिंग हब होने के कारण यहां जेन जी वोटर्स की आबादी अच्छी खासी है. इस सीट पर जेन जी वोटर्स की संख्या करीब 33% है. प्रशांत किशोर हमेशा से ही पलायन, बेरोजगारी और शिक्षा के मुद्दे उठाते रहे हैं. नीट पेपर लीक को लेकर दिल्ली में शुरू हुए प्रोटेस्ट की लहर पटना तक भी पहुंची थी. प्रशांत किशोर को ये अंदाजा हो गया था कि युवा बीजेपी के खिलाफ जा रहे हैं. औऱ उन्होंने बांकीपुर जैसी मुश्किल सीट से चुनावी मैदान में उतरने का फैसला किया.

पीके की जीत में जंतर-मंतर प्रोटेस्ट ने भी निभाई भूमिका

प्रशांत किशोर भले ही ये बात स्वीकार ना करे कि उनके चुनाव लड़ने में जंतर-मंतर प्रोटेस्ट की बड़ी भूमिका है. लेकिन जैसे ही इस सीट पर प्रशांत किशोर की जीत पक्की हुई, उन्होंने अपने सबसे पहले बयान में जेन जी की ही बात की. सम्राट चौधरी पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि बीजेपी की सेंट्रल लीडरशिप अपना मुख्यमंत्री चेंज करें. किसी ऐसे को मुख्यमंत्री बनाए जो बिहार के नौजवानों का पलायन रोके, उन्हें रोजगार और अच्छी शिक्षा दे. जाहिर है प्रशांत किशोर की जीत सम्राट चौधरी का फेलियर तो है ही. साथ ही ये बीजेपी की सेंट्रल लीडरशिप के फैसलों पर भी बड़े सवाल खड़े करती है.