कौन थे UP के सबसे बुजुर्ग विधायक आलम बदी? 90 साल की उम्र में ली अंतिम सांस, क्यों कहे जाते थे देश के सबसे ईमानदार MLA

Published on 23 जुल॰ 2026

MLA Alam Badi: यूपी की राजनीति में एक अहम घटनाक्रम घटा है. यूपी के सबसे बुजुर्ग विधायक आलम बदी का निधन हो गया. आलम बदी समाजवादी पार्टी से संबंध रखते थे. वह 90 वर्ष के थे और काफी समय से बीमार चल रहे थे.

आलम बदी उत्तर प्रदेश की राजनीति का एक जाना-माना नाम थे. वह आजमगढ़ की निजामाबाद विधानसभा सीट से कई बार विधायक चुने गए और 2012 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भी इसी सीट से जीत हासिल की थी. आलम बदी आजमगढ़ की निजामाबाद विधानसभा सीट से 5 बार विधायक चुने गए थे. सादगी और साफ-सुथरी छवि के लिए पहचाने जाने वाले आलम बदी को प्रदेश के सबसे ईमानदार नेताओं में भी गिना जाता था. उनके निधन से प्रदेश की राजनीति में एक लंबे अनुभव वाले जनप्रतिनिधि का दौर समाप्त हो गया.

समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं आज़मगढ़ की निज़ामाबाद विधानसभा से लोकप्रिय विधायक जनाब आलम बदी साहब का इंतकाल, अत्यंत दुखद!

दिवंगत आत्मा को शांति दें भगवान।

शोकाकुल परिजनों को यह असीम दुःख सहने का संबल प्राप्त हो।

भावभीनी श्रद्धांजलि! pic.twitter.com/RFnjvVMoyf

— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) July 23, 2026

ईमानदार विधायक से थी पहचान

आलम बदी की पहचान सिर्फ एक जनप्रतिनिधि के रूप में नहीं, बल्कि ईमानदार, सादगीपूर्ण और साफ-सुथरी राजनीति करने वाले नेता के रूप में भी थी. यही वजह थी कि उन्हें उत्तर प्रदेश के सबसे ईमानदार नेताओं में गिना जाता था. उनके निधन से प्रदेश की राजनीति ने एक अनुभवी और सम्मानित नेता को खो दिया. 

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आजमगढ़ में ली अंतिम सांस

समाजवादी पार्टी के संस्थापक सदस्यों में शामिल और उत्तर प्रदेश विधानसभा के सबसे वरिष्ठ विधायक आलम बदी आजमी का निधन हो गया. वह 90 वर्ष के थे और लंबे समय से बीमार चल रहे थे. उन्होंने आजमगढ़ के कुर्मी टोला स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली. आलम बदी आजमी का इलाज काफी समय से लखनऊ के एक अस्पताल में चल रहा था. अपनी सादगी, साफ-सुथरी छवि और ईमानदार राजनीति के लिए पहचाने जाने वाले आलम बदी आजमगढ़ की निजामाबाद विधानसभा सीट से पांच बार विधायक चुने गए थे.

सपा के लिए बड़ा झटका

आलम बदी आजमी के निधन से समाजवादी पार्टी और प्रदेश की राजनीति को बड़ा झटका लगा है. उनका अंतिम संस्कार (सुपुर्द-ए-खाक) गुरुवार शाम 4 बजे शहर के हर्रा की चुंगी स्थित जामेतुरशाद कब्रिस्तान में किया जाएगा. 

क्यों कहे जाते थे सबसे ईमानदार विधायक?

5 बार विधायक रहने के बावजूद आलम बदी आजमी ने राजनीति को कभी कमाई का जरिया नहीं बनाया. उन्होंने सादगी, ईमानदारी और जनसेवा को हमेशा प्राथमिकता दी. 

लौटा दिया था चुनावी फंड

साल 1996 के विधानसभा चुनाव में भी आलम बदी आजमी ने अपनी सादगी और ईमानदारी की मिसाल पेश की थी. चुनाव प्रचार के लिए समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव ने उन्हें 5 लाख रुपये दिए थे, लेकिन उन्होंने यह कहते हुए पूरी राशि वापस कर दी कि चुनाव लड़ने के लिए उन्हें पैसों की जरूरत नहीं है. यह घटना उनकी साफ-सुथरी राजनीति और सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्धता का बड़ा उदाहरण मानी जाती है.

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ठुकरा दिया था मंत्री पद

2012 में जब उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार बनी, तब आलम बदी आजमी को मंत्री बनने का मौका मिला. लेकिन उन्होंने सत्ता और पद की बजाय जनता की सेवा को प्राथमिकता देते हुए यह प्रस्ताव ठुकरा दिया. उनका मानना था कि मंत्री बनने से ज्यादा जरूरी अपने क्षेत्र के लोगों के बीच रहकर उनकी समस्याओं का समाधान करना है. यही फैसला उनकी जनसेवा के प्रति समर्पित सोच को दर्शाता है.

'सादा जीवन उच्च विचार' में विश्वास

आलम बदी आजमी का जीवन पूरी तरह सादगी से जुड़ा था. पांच बार विधायक बनने के बाद भी उन्होंने न सरकारी ठाठ-बाट अपनाया और न ही आलीशान जीवन जिया. वे अक्सर रोडवेज बसों में सफर करते थे, साधारण कपड़े पहनते थे और आम लोगों की तरह ही रहते थे. यही सादगी उन्हें दूसरे नेताओं से अलग पहचान दिलाती थी.

 नेताओं ने जताया शोक

आलम बदी आजमी के निधन की खबर से पूरे उत्तर प्रदेश, खासकर पूर्वांचल में शोक की लहर है. अपनी ईमानदार और सादगीपूर्ण राजनीति के लिए पहचान बनाने वाले इस वरिष्ठ नेता को श्रद्धांजलि देने उनके आवास पर बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं. समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उनके निधन को पार्टी और समाज के लिए बड़ी क्षति बताते हुए शोक व्यक्त किया. वहीं, उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने कहा कि आलम बदी का निधन प्रदेश की राजनीति और सार्वजनिक जीवन के लिए अपूरणीय क्षति है. उनके निधन पर विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी गहरा दुख जताया है.