टूटे पैर, बिगड़ा इंटरव्यू फिर भी अफरस बनने की थी जिद; नरसिंहपुर की बेटी ने कैसे लहराया UPSC में परचम

Published on 5 सित॰ 2026

नरसिंहपुर की प्राची जैन ने टूटे पैर, बिगड़े इंटरव्यू और असफल प्रीलिम्स के बावजूद यूपीएससी सिविल सेवा 2025 में सफलता हासिल की है।

कहते हैं कि मंजिल तक पहुंचने का रास्ता कभी सीधा नहीं होता लेकिन मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर की प्राची जैन की कहानी सुनकर यह बात और भी गहराई से समझ आती है। तीन बार यूपीएससी की परीक्षा दी, एक बार प्रीलिम्स में मात खाई, दूसरी बार इंटरव्यू तक पहुंचकर भी नाम फाइनल लिस्ट से गायब रहा और उसी दौर में पैर तक फ्रैक्चर हो गया। फिर भी हार नहीं मानी। तीसरी कोशिश में प्राची ने UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 में ऑल इंडिया रैंक 714 हासिल कर ली और अब चौंकाने वाली बात यह है कि सेवा में शामिल होने के बावजूद वे 2027 में एक और अटेम्प्ट देने की तैयारी में जुटी हैं।

वो झटका जिसने रास्ता बदल दिया

प्राची की स्कूली पढ़ाई नरसिंहपुर में हुई, इसके बाद वे ग्रेजुएशन के लिए भोपाल गईं और सरोजिनी नायडू गर्ल्स कॉलेज से कॉमर्स की पढ़ाई पूरी की। सिविल सेवा में जाने का ख्याल उन्हें वहीं आया, अपने जिले के एक अफसर का काम देखकर जिनकी छवि लोगों के बीच बेहद सम्मानजनक थी। उसी अफसर को देखकर प्राची ने तय किया कि उन्हें भी यही राह चुननी है।

2023 में पहला अटेम्प्ट दिया, लेकिन तैयारी उतनी पुख्ता नहीं थी और प्रीलिम्स में ही बात बिगड़ गई। हिम्मत नहीं हारी। 2024 में दोबारा मैदान में उतरीं, इस बार रणनीति बदली हुई थी। प्रीलिम्स और मेन्स दोनों पार कर लिए, लेकिन ठीक उसी वक्त जब मेन्स की तैयारी के लिए सबसे ज्यादा मेहनत की जरूरत थी, उनका पैर फ्रैक्चर हो गया। दो महीने बिस्तर पर गुजरे। इसका सीधा असर मेन्स के नतीजों पर पड़ा। इंटरव्यू तक पहुंचीं, मगर फाइनल लिस्ट में जगह नहीं बन पाई।

तीसरी बार दिया अटेम्प्ट

2025 के अटेम्प्ट में प्राची ने अपनी मजबूत कड़ियों जैसे कि जीएस पेपर 2 और जीएस पेपर 4 पर खास फोकस किया, साथ ही ऑप्शनल सब्जेक्ट सोशियोलॉजी पर भी मेहनत की। दिलचस्प बात यह है कि सोशियोलॉजी उन्होंने किसी गहरी पढ़ाई की बुनियाद पर नहीं, बल्कि इसलिए चुना था क्योंकि इसकी स्टडी मटीरियल आसानी से मिल जाती थी। लेकिन यही विषय उनकी सबसे कमजोर कड़ी भी बन गया, और खुद प्राची मानती हैं कि इसी वजह से उनकी रैंक थोड़ी पीछे रह गई। मेन्स की रिकमेंडेड लिस्ट के मुताबिक उन्हें कुल 936 अंक (741 राइटन और 195 इंटरव्यू) मिले, और वे ईडब्ल्यूएस श्रेणी से चुनी गईं।

इस बार का इंटरव्यू भी पिछली बार जैसा सहज और खुशनुमा नहीं था। बोर्ड ने उनसे मजेदार सवाल भी पूछे, जैसे कि क्या उन्होंने कभी किसी को मारा है? जवाब मिला कि अपनी बड़ी बहन को। फिर पूछा गया क्या कभी कुछ चुराया है? प्राची ने बेबाकी से कबूला कि डॉक्टर की मनाही के बावजूद उन्होंने घर के फ्रिज से मिठाइयां चुराकर खाई थीं। इन्हीं हल्के-फुल्के जवाबों ने पूरे इंटरव्यू का माहौल बना दिया।

गौरतलब है कि यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2025 के फाइनल रिजल्ट में कुल 958 उम्मीदवार चुने गए, जिनमें 317 जनरल, 104 ईडब्ल्यूएस, 306 ओबीसी और 73 एसटी वर्ग से थे। यूपीएससी सीएसई 2025 फाइनल परीक्षा में सफल हुए 958 उम्मीदवारों में से 317 सामान्य वर्ग से, 104 आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग यानी ईडब्ल्यूएस से, 306 अन्य पिछड़ा वर्ग यानी ओबीसी से और 73 अनुसूचित जनजाति यानी एसटी वर्ग से रहे।

रुकने का नाम नहीं

रैंक मिलने के बाद प्राची कहती हैं कि इससे सिर्फ करियर नहीं बदला, बल्कि खुद पर भरोसा भी बढ़ा। उनकी सलाह बेहद सीधी है कि खुद से झूठ मत बोलो। उनके मुताबिक, कोई भी उम्मीदवार अपनी ताकत और कमजोरी को खुद से बेहतर कोई नहीं जानता। यही वजह है कि सेवा जॉइन करने के बावजूद वे 2027 में फिर परीक्षा देने का मन बना चुकी हैं इस बार सोशियोलॉजी की उन्हीं कमियों को दूर करने के इरादे से, और इस भरोसे के साथ कि एक बार परीक्षा पार कर चुकने का अनुभव अब उनके साथ है।