VFX और CGI में क्या फर्क होता है? कैसे तैयार होते हैं फिल्मों के हैरतअंगेज विजुअल्स और दमदार सीन

Published on 24 जुल॰ 2026

What is The Diffrence Between VFX And CGI: आज पूरी दुनिया में फिल्में बनाने  का तरीका पूरी तरह बदल चुका है. फिल्मों में पहले किसी युद्ध, बड़े-बड़े महल, उड़ते हुए सुपरहीरो या हजारों सैनिकों को एक साथ दिखान बहुत मुश्किल काम होता था. लेकिन अब 'रामायण', 'अवतार', 'अवेंजर्स', 'कल्कि 2898 AD' जैसी फिल्मों ऐसे सीन आसानी से देखने को मिलते हैं. कई बार तो लोग समझ ही नहीं पाते हैं कि स्क्रीन पर जो दिख रहा है, वह सच है या कंप्यूटर बनाए गए सीन्स हैं. इसके लिए दो शब्द सबसे ज्यादा सुनने को मिलते हैं पहला VFX और दूसरा CGI. सोशल मीडिया पर अक्सर लोग कहते हैं कि इस फिल्म का CGI अच्छा नहीं है या इसका VFX शानदार है. लेकिन सच यह है कि दोनों एक चीज नहीं हैं. दोनों का काम अलग है और दोनों मिलकर फिल्मों में वह दुनिया बनाते हैं, जिसे कैमरे से शूट कर पाना पॉसिबल नहीं होता. आइए इस एक्सप्लेनर में आसान भाषा में समझते हैं कि वीएफएक्स और सीजीआई में क्या अंतर होता है और फिल्मों के बड़े-बड़े विजुअल्स आखिर बनाए जाते हैं. 

VFX किसे कहते हैं?

VFX को अंग्रेजी में विजुअल्स इफैक्ट्स (Visual Effects) कहते हैं. इसका मतलब है कि कैमरे से शूट किए गए असली सीन में बाद में कम्प्यूटर की मदद से बदलाव करना. उदाहरण के लिए मान लीजिए किसी फिल्म में हीरो को 100 मंजिल ऊंची बिल्डिंग की छत पर खड़ा दिखाना है. असल लाइफ में ऐसा करना जोखिम भरा हो सकता है. इसलिए एक्टर स्टूडियो में ग्रीन स्क्रीन के सामने एक्टिंग करता है. बाद में VFX टीम उस हरे पर्दे को हटाकर उसकी जगह ऊंची बिल्डिंग जोड़ देती है. यानी जहां असली शूटिंग और कंप्यूटर को काम मिलकर एक असली जैसा सीन बनाया जाता है. इसी तकनीक को VFX कहा जाता है. 

CGI क्या होता है?

CGI को अंग्रेजी में कंप्यूटर जनरेटेड इमेजरी (Computer Generated Imagery) कहा जाता है. इस टेक्नॉलॉजी में पूरी चीज कम्प्यूटर के जरिए ही तैयार की जाती है. यहां कैमरे से कोई असली शूटिंग जरूरी नहीं होती. उदाहरण के लिए डायनासोर, ड्रैगन, एलियन, मार्वल का हल्क, थैनोस, 'अवतार' के नीले Na'vi या फ्यूचर की उड़ने वाली गाड़ियां. ये सभी पहले 3D सॉफ्टवेयर से डिजाइन किए जाते हैं. फिर उनमें कलर्स, ब्राइटनेस, कपड़े, चेहरे के एक्सप्रेशन और मूवमेंट जोड़ी जाती है. यानी जो चीज पूरी तरह कम्प्यूटर के अंदर बनाई जाए, उसे CGI कहा जाता है.

VFX और CGI में सबसे बड़ा फर्क क्या होता है?

वीएफएक्स और सीजीआई में फर्क बहुत से लोगों का कंफ्यूज करता है. सीधी भाषा में समझिए. अगर किसी एक्टर की असली शूटिंग में कम्प्यूटर से बना महल जोड़ दिया जाए, तो पूरा काम VFX कहलाएगा. लेकिन उस महल को बनाने की तकनीक CGI होगी. यानी CGI एक डिजिटल टूल होचा है, जबकि VFX पूरा प्रोसेस है. दूसरे शब्दों में कहें तो हर CGI, VFX का हिस्सा बन सकता है, लेकिन हर VFX सिर्फ CGI नहीं होता.

फिल्मों में बड़े-बड़े सीन कैसे तैयार होते हैं?

फिल्मों में नजर आने वाले शानदार सीन को बनाने के पीछे महीनों की मेहनत होती है.सबसे पहले डायरेक्टर और VFX टीम मिलकर स्टोरीबोर्ड बनाती है. इसमें तय किया जाता है कि कैमरा कहां रहेगा, एक्टर किस डायरेक्शन में देखेगा और बाद में कौन-सी चीज जोड़ी जाएगी. इसके बाद शूटिंग होती है. ग्रीन स्क्रीन लगाई जाती है. एक्टर की बॉडी पर छोटे-छोटे मार्कर लगाए जाते हैं ताकि कंप्यूटर उनकी मूवमेंट्स हर हरकत को पहचान सके. शूटिंग पूरी होने के बाद पोस्ट-प्रोडक्शन शुरू होता है. यही वह जगह है जहां ये सारे काम होते हैं. यहां बैकग्राउंड, धुआं, आग, बारिश, एक्सपलोजन, महल, पहाड़, नदी और दूसरी डिजिटल चीजें जोड़ी जाती हैं.

ग्रीन स्क्रीन आखिर हरी ही क्यों होती है?

कई लोगों में मन सवाल आता होगा कि आखिर ये ग्रीन स्क्रीन क्या होता है. असल वजह यह है कि इंसानी स्किन और बालों में हरा रंग नहीं होता. इसलिए कंप्यूटर आसानी से हरे रंग को हटाकर उसकी जगह मन चाह बैकग्राउंड लगा देता है. अगर कलाकार ने हरे रंग के कपड़े पहन लिए हों तो वो हिस्सा भी हट सकता है. इसलिए शूटिंग के दौरान कॉस्ट्यूम का भी विशेष रूप से ध्यान रखा जाता है. 

मोशन कैप्चर क्या होता है?

आज की बड़ी फिल्मों में सिर्फ कम्प्यूटर से मॉडल बनाना काफी नहीं होता. अगर किसी डिजिटल कैरेक्टर को इंसानों जैसी चाल, हंसी, रोना या लड़ाई दिखानी हो तो Motion Capture टेक्नॉलॉजी का यूज होता है. इसमें कलाकार एक खास तरह का सूट पहनता है जिस पर कई सारे सेंसर लगे होते हैं. चारों तरफ लगे कैमरे उसकी हर मूवमेंट्स रिकॉर्ड करते हैं. बाद में वही मूवमेंट किसी डिजिटल कैरेक्टर में जोड़े जाते हैं. 'अवतार', 'लॉर्ड ऑफ द रिंग्स' के गोलम और कई मार्वल फिल्मों में इसी टेक्नॉलॉजी का यूज हुआ था. 

कभी-कभी VFX खराब क्यों दिखाई देता है?

हर बड़ी फिल्म का VFX अच्छा हो, ऐसा जरूरी नहीं. इसी कई बड़ी वजहें होती हैं.  सबसे बड़ा कारण  टाइम की कमी है. कई बार रिलीज डेट तय होने के कारण VFX टीम को जल्दबाजी में काम करती हैं.  दूसरा कारण लाइटिंग होती है. अगर एक्टर पर पड़ने वाली रोशनी और कंप्यूटर से बने बैकग्राउंड की रोशनी अलग हो, तो सीन नकली लगते हैं.  तीसरी वजह बजट भी होता है. अच्छी VFX टीम, महंगे कंप्यूटर और समय की बहुत जरूरत होती है. कम बजट में अक्सर शानदार वीएफएक्स नहीं बन पाते हैं. यही वजह है कई बार वीएफएक्स खराब देते हैं. 

अब ग्रीन स्क्रीन की जगह यूज होती है नई टेक्नॉलॉजी

फिल्म इंडस्ट्री में काम करने का तरीका तेजी से बदल रहा है. अब कई बड़ी फिल्मों में ग्रीन स्क्रीन की जगह LED वॉल और Virtual Production का भी यूज किया जाने लगा है. इस टेक्नॉलॉजी में एक्टर के पीछे बहुत बड़ी LED स्क्रीन लगी होती है जिस पर रियल  जैसा दिखने वाला 3D बैकग्राउंड चलता रहता है. इससे एक्टर को भी पता रहता है कि वह किस माहौल में एक्टिंग कर रहा है और कैमरे में रोशनी भी बिल्कुल नेचुरल दिखाई देती है. इस टेक्नॉलॉजी का हॉलीवुड की कई फिल्मों में यूज हो चुका है. 

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