चाय-कॉफी नहीं, उसका खौलता तापमान बढ़ाता है कैंसर का खतरा! WHO और ग्लोबल रिसर्च का खुलासा; जानिए किस तापमान पर पीना है सुरक्षित

Published on 10 सित॰ 2026

चाय-कॉफी नहीं, उसका खौलता तापमान बढ़ाता है कैंसर का खतरा! WHO और ग्लोबल रिसर्च का खुलासा; जानिए किस तापमान पर पीना है सुरक्षित

सुबह की शुरुआत एक कप कड़क चाय से करना या काम के बीच गरमा-गरम कॉफी की चुस्की लेना भारतीय जीवनशैली का अहम हिस्सा है। कई लोग तो कप में से भाप निकलते रहने के दौरान ही घूंट भरने के आदी होते हैं। यदि आपकी भी यही आदत है, तो संभल जाइए। अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य शोधकर्ताओं और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की कैंसर रिसर्च एजेंसी IARC (International Agency for Research on Cancer) के व्यापक अध्ययनों से साफ हुआ है कि खतरा चाय या कॉफी के तत्वों में नहीं, बल्कि उसके अत्यधिक उच्च तापमान (High Temperature) में छिपा है।

शोध के अनुसार, 65 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक तापमान वाले पेय पदार्थों का नियमित सेवन भोजन नली के कैंसर यानी एसोफेजियल कैंसर (Esophageal Cancer) का खतरा लगभग दोगुना तक बढ़ा देता है।

शरीर के अंदर कैसे काम करता है यह 'थर्मल डैमेज'?

भोजन नली (Food Pipe या Esophagus) की अंदरूनी परत बेहद कोमल और संवेदनशील म्यूकोसल कोशिकाओं (Epithelial Cells) से बनी होती है। जब कोई व्यक्ति लगातार बहुत तेज गर्म तरल पदार्थ निगलता है, तो भीतर निम्नलिखित प्रक्रियाएं होती हैं:

  • थर्मल बर्न और सूक्ष्म घाव: 65°C से अधिक गर्म चाय या पानी गले से उतरते ही भोजन नली की नाजुक अंदरूनी दीवार को झुलसा देता है, जिससे वहां सूक्ष्म छाले और जलन पैदा होती है।

  • क्रोनिक इंफ्लेमेशन (लगातार सूजन): यदि कोई व्यक्ति दिन में 3 से 4 बार खौलती चाय पीता है, तो इन कोशिकाओं को ठीक होने का समय नहीं मिलता और वहां लगातार सूजन की स्थिति बन जाती है।

  • कोशिकाओं में म्यूटेशन: बार-बार जलने और खुद को तेजी से रिपेयर करने की प्रक्रिया के दौरान कोशिकाओं का डीएनए क्षतिग्रस्त होने लगता है। यही अनियंत्रित सेल रिपेयर आगे चलकर कैंसरयुक्त ट्यूमर का रूप ले लेता है।

ग्लोबल रिसर्च के चौंकाने वाले आंकड़े

  • द लांसेट ऑन्कोलॉजी की रिपोर्ट: IARC द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट में 65°C से ऊपर के बहुत गर्म पेय पदार्थों (Very Hot Beverages) को Group 2A Carcinogen (मानव में संभावित कैंसरकारी) की श्रेणी में रखा गया है।

  • इंटरनेशनल जर्नल ऑफ कैंसर का अध्ययन: 50,000 से अधिक लोगों पर किए गए 10 साल के एक अध्ययन में पाया गया कि जो लोग रोजाना 700 मिलीलीटर (लगभग 2 बड़े मग) चाय 60°C या उससे अधिक तापमान पर पीते हैं, उनमें सामान्य या गुनगुनी चाय पीने वालों की तुलना में एसोफेजियल कैंसर का जोखिम 90% तक अधिक पाया गया।

  • धूम्रपान और शराब के साथ दोगुना खतरा: शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि जो लोग गर्म चाय-कॉफी के साथ सिगरेट, बीड़ी या तंबाकू का सेवन करते हैं, उनमें यह जोखिम 4 से 5 गुना बढ़ जाता है, क्योंकि जली हुई भोजन नली तंबाकू के टॉक्सिन्स को अधिक तेजी से सोखती है।

सुरक्षित रहने के लिए किस तापमान पर पिएं चाय-कॉफी?

कैंसर से बचाव के लिए आपको अपनी पसंदीदा चाय या कॉफी छोड़ना कतई जरूरी नहीं है। बस अपनी पीने की शैली में ये साधारण बदलाव लाएं:

  • 3 से 5 मिनट का 'कूलिंग टाइम': कप में चाय या कॉफी डालने के बाद कम से कम 3 से 4 मिनट तक प्रतीक्षा करें। इतनी देर में उसका तापमान सुरक्षित स्तर यानी 50°C से 58°C के बीच आ जाता है।

  • दूध मिलाने का फायदा: यदि आप ब्लैक टी या ब्लैक कॉफी के बजाय हल्का दूध मिलाकर पीते हैं, तो तापमान तुरंत सामान्य स्तर पर आ जाता है।

  • भाप और पहली सिप का नियम: यदि कप से तेजी से भाप निकल रही हो और कप को हाथ से पकड़ना मुश्किल हो रहा हो, तो उसे सीधे होंठों से न लगाएं।

  • कुल्हड़ या चौड़े मुंह वाले कप: चौड़े मुंह वाले कप में पेय तेजी से ठंडा होता है, जिससे जलन का खतरा कम हो जाता है।