दुनिया के सबसे अमीर शख्स एलॉन मस्क ने X पर एक पोस्ट किया है. इस पोस्ट में उन्होंने लिखा है, 'क्या अंबानी इंडिया के बॉस हैं'. Starlink को लेकर विवाद गहराता जा रहा है. मस्क ने एक पोस्ट के रिप्लाई में ये बात कही. X पर एक पोस्ट में Dr Aniruddha ने ये लिखा था कि क्या सरकार भारतीय सिटिजन को छोड़ कर क्रोनी कैपिटिलिज्म को बचा रही है? इसी पोस्ट को कोट करते हुए मस्क ने लिखा, 'Starlink को 165 देशों में लाइसेंस मिला हुआ है और पांच साल तक हर कंप्पलायंस पूरा करने के बावजूद भारत में उन्हें लाइसेंस क्यों नहीं मिल रहा? क्या अंबानी भारत के असली बॉस हैं?
मस्क ने भारत में अपनी सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस की लॉन्चिंग में हो रही देरी को लेकर अब सीधे देश के टेलीकॉम पावर स्ट्रक्चर पर सवाल उठा दिया है. पहले मस्क ने बिना नाम लिए कुछ ‘ओलिगार्क्स’ पर Starlink को रोकने का आरोप लगाया और अब कुछ घंटे बाद उन्होंने सीधे सवाल किया है, 'Is Ambani the real boss of India?'
Starlink is licensed in over 165 countries and has spent five years complying with every single law and requirement of the government of India, so why still no license? Is Ambani the real boss of India?
— Elon Musk (@elonmusk) October 8, 2026
मस्क का यह पोस्ट ऐसे समय आया है जब भारत सरकार उनके आरोपों को साफ तौर पर खारिज कर चुकी है. सरकार का कहना है कि देश में सैटेलाइट कम्युनिकेशन के लिए नियम सभी कंपनियों पर बराबर लागू होते हैं और Starlink के साथ किसी तरह का भेदभाव नहीं किया जा रहा.
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इस पूरे विवाद में दिलचस्प बात यह है कि मस्क ने पहले किसी कारोबारी का नाम नहीं लिया था. उन्होंने कहा था कि कुछ ताकतवर कारोबारी अपने ‘मोनोपॉली’ को बचाने के लिए Starlink की भारत में एंट्री रोक रहे हैं. लेकिन अब उनके नए पोस्ट में अंबानी का नाम सीधे आ गया है. इससे भारत के सैटेलाइट इंटरनेट बाजार की पुरानी खींचतान अचानक खुलकर सामने आ गई है.
मस्क ने अब क्या कहा?
मस्क ने X पर लिखा कि Starlink को 165 से ज्यादा देशों में लाइसेंस मिल चुका है और कंपनी पिछले पांच साल से भारत सरकार के हर कानून और जरूरत को पूरा करने की कोशिश कर रही है. इसके बाद उन्होंने सवाल किया कि फिर भारत में अभी तक लाइसेंस क्यों नहीं मिला?
इसके तुरंत बाद मस्क ने लिखा, “Is Ambani the real boss of India?”
इससे पहले मस्क ने लगाया था ‘मोनोपॉली’ का आरोप
इससे कुछ घंटे पहले मस्क ने Starlink की भारत में देरी को लेकर ज्यादा तीखा बयान दिया था. उन्होंने आरोप लगाया था कि कुछ ताकतवर कारोबारी Starlink को भारत में आने से रोक रहे हैं ताकि भारतीय लोगों पर अपना ‘मोनोपॉली कंट्रोल’ बनाए रखा जा सके. मस्क ने इसे भारत के लोगों के खिलाफ अपराध तक बताया था. उस समय उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया था.
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मस्क का तर्क है कि Starlink खासकर उन इलाकों के लिए उपयोगी हो सकता है जहां मोबाइल टावर या फाइबर नेटवर्क पहुंचाना मुश्किल है. भारत में गांवों, पहाड़ी क्षेत्रों और दूरदराज के इलाकों में ऐसी सर्विस इंटरनेट की पहुंच बढ़ा सकती है.
यानी मस्क इस विवाद को सिर्फ अपनी कंपनी के कारोबारी हित के तौर पर पेश नहीं कर रहे. वह इसे उन भारतीयों के इंटरनेट एक्सेस से जोड़ रहे हैं जिनके पास अभी तेज और भरोसेमंद कनेक्टिविटी नहीं है.
भारत सरकार ने मस्क को क्या जवाब दिया?
मस्क के आरोप के बाद भारत सरकार ने तुरंत प्रतिक्रिया दी. संचार मंत्रालय ने 8 अक्टूबर को जारी बयान में कहा कि भारत का सैटेलाइट कम्युनिकेशन रेगुलेटरी फ्रेमवर्क निष्पक्ष और गैर-भेदभाव वाला है. सरकार ने बताया कि तीन सैटेलाइट कम्युनिकेशन कंपनियों को लाइसेंस दिए गए हैं और तीनों को सुरक्षा से जुड़ी शर्तें पूरी करनी हैं.
सरकार के मुताबिक इन तीनों कंपनियों का सुरक्षा मूल्यांकन अभी चल रहा है और तीनों फिलहाल लगभग एक ही रेगुलेटरी स्टेज पर हैं. सुरक्षा प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही कंपनी स्पेक्ट्रम असाइनमेंट के अगले चरण में जा सकती है. इसलिए सरकार ने इस आरोप को कि नियमों का इस्तेमाल किसी कंपनी के खिलाफ भेदभाव के लिए किया जा रहा है, बेबुनियाद बताया है.
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